पिया के चिठ्ठी
सीया लिखलनि चीठी रामकेर नाम सँ...
-------------------------------
चारि पाँति सुनू राम केर नाम सँ
पत्र लिखलनि सीता धरा धाम सँ
भेल जिनगी के गेंठ फुलवारी मे भेंट
नाम तहिये जोड़ायल आहाँ नाम सँ...
प्रथमहिं धरैत तीन माता केर ध्यान
कहि राज केर जय हो, हे प्रियतम प्रणाम
आहाँ कोना क' हमरा बिसरिये गेलहुँ
बाट तकिते छी एखनहुँ अपन गाम सँ...
यदि हमरे सिनेहवश लंका गेलहुँ
त' पतालहुँ मे आउ कियै पाथर भेलहुँ
संग चूड़ी आ सेनुर एतहु अछि हमर
आहाँ बारल नहि जायब कोनहुँ सम्मान सँ...
पतालहुँ मे सागर बहै छै पीया
चान कारी एतय आ सुरुज करिया
समइतहुँ ने धरती त' जइतहुँ कतय
कहु जीबितहुँ कोना हम घटल मान सँ...
हरण होयबाक बाद हम लंका मे जायब
सेतु सागर पर सजि आहाँ विजयी कहायब
अयोध्या मे आनि फेर जंगल पठायब
आहाँ परिचित छलहुँ सब परिणाम सँ...
आबि आहाँ देखायब झलक जहिया
हम कोना खसायब पलक तहिया
हम ककरा सँ करबै कोनहुँ याचना
आहाँ कम छी कहू कोन भगवान सँ...
कने बाजू ने प्राण आहाँ ई की केलहुँ
कोना सोना के आहाँ मानि सीता लेलहुँ
हम विदेहक धीया तैं विदेही भेलहुँ
तथ्य राखब नुकाय हमर संतान सँ...
नहिं एखनहुँ आहाँ सँ इतर भेल छी
आब रघुकुल केर हमहुँ पितर भेल छी
धीया ससुरहि मे नीक बाद स्वर्गहि मे नीक
हम मानिनि कहाबी अपन मान सँ...
*****************
गीतकार - श्री रविन्द्रनाथ ठाकुर
साभार- पेज मैथिली कविता
कोई टिप्पणी नहीं