डिबिया हमहू जरेली बहुत - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

डिबिया हमहू जरेली बहुत

नयन के आगु कनिक छाह् चमकल बहुत,
हम अहाँ सँ बिछोड़लौ त दिलमे सुर्ता आयल बहुत ।

छेलै ओकरा डूबल सूरज सँ लगाउ कतेक,
भेलै जौं साँझ त कुछ लोग याद एलै बहुत।

ई बितरहल राइत ई नयन सुतल सुनसान,
बितल दिनक कहानी सुनाबि हम बहुत ।

ओहिलेल की ई अन्हार रस्ता मे काम एतै,
हम अहाँ गली सँ रोशनी लके एली बहुत।

नजर गेलै कतेक चेहरा पर अहाँ के पीछा करैत,
अहाँ के खोजै मे हम धोख़ा खेलौ बहुत ।

हटल नै अन्हार "अशोक" घरक आँगन के,
डिबिया हमहूँ ओसरा पर जरेलियै बहुत ।

✍अशोक कुमार सहनी
लहान ४ रघुनाथपुर
हॉल-(दोहा क़तार)

#अपन_मिथिला

कोई टिप्पणी नहीं