बेटीक व्यथा सुनबैत छैथ पिता के
एक टा एहन बेटी जिनका लेल जेहने सासुर तेहने नैहर ओ अपन पिता स अपन व्यथा सुनाबैत छैथ l
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सुनु यौ बाबु एक टा बात पुछै छी l
आई अछैते जिनगी हमरा किया मारै छी? ?
हमरा जनमिते कन्ना-रोहट भेलै घर में l
बचपन बीत गेलै हमर एही डर में ll
एलै समय ज़खन स्कूल जाय के l
हमरा पठेलौ सरकारी आ प्राइवेट में भाय के ll
एलै यौवन ज़खनें हमर शाशन भेलै लागू l
संगे-संगे हँसी-खुशी पर सेहो भेलै काबू ll
बाबू यौ आहा किया भेलौह दूरंगा l
भाई के नवका जीन्स-पैंट आ हमरा फाटल अंगा ll
ओहो समय आब आबिये गेलै l
बाबू के नकली प्यार स छूटकारा भेलै ll
हेतै बियाह आब सासुर जेबै l
कष्टक दिन ख़तम भेलै आब सब सुख पेबै ll
आब विवाहक समय एलैन , खुशी स हाल बेहाल की कष्टक दिन समाप्त भेल ll लेकिन कर्मक दोष आ अपन समाजक मानसीकता हूनकर खुशी छीन लेलक ll . . . . . . .
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गेलौ बियाहि सासुर हम ज़खनें l
धधकैत आईग में जरनौ तख़नें ll
सासु जी के बोल ओल सन
ननद भेटल चीनगारी l
पिया जी भेटला राजकुमार सन
मुदा हृदय स सौंसे कारी ll
देवर, भैंसुर के बात जूनी पूछू
सब एकैह रंग स रांगल l
ससुर जी के काज कोनो नय
हमरे पर जी छैन्ह टाँगल ll
केहन किस्मत लिखलैथ दैवा
सुख-शांती के भेल अकाल l
अपनों हक लेल मुँह ज़ खोली
सौंसे घर मैच जाय बवाल ll
नारी केर जिनगी बड्ड पहाड़ छै
जिबै के नय कोनो अधिकार l
जा धैर जिबैत रहब दुनियाँ में
सहैत रहूँ पुरुखक अत्याचार ll
((((#R__Mishra))))
__✍रोशन मिश्रा जी
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