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मैथिलि ग़ज़ल "मोला"

दु:ख गरीबहे पर किया जाक बजारि दै छ हो मोला
जेहे जपति नाम ओकरे तू फटकारि दै छ हो मोला

पापक पोटरी सँ बनाएल बल्डिंग महल सब छोड़ि
गरीबहे के झोपड़ी किया तू  उजारि दै छ हो मोला

तोहरो नजरि मे गरीब के कोनो मूल्यता नै छै आब
जे सुख सँ बन्जित कैर कुहरा क मारि दै छ हो मोला

दुखक भागी बना गरीबहे के जनम दै छ जग मे
लिखैत काल गरीबहे के नसीब जारि दै छ हो मोला

बड़ कठिन छै गरबी जिनगी जीअल एहि जग में
गरीबक घर ढाहि अमिरक घर सबारि दै छ हो मोला

✍ अशरफ़ राईन
सिनुरजोडा ,धनुषा
हाँल : कतार

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