टूटि गेलै मोन
टूटि गेलै मोन आ बहि गेलै नयना
बाट निहारति रहि गेलै नयना
आब त' आइर धूर सभ तोड़' चाहै
जानि ने की की कहि गेलै नयना
एकटा चान हियामे मुसकति रहलै
क्षण भरिमे बस गहि गेलै नयना
तोहर देखल स्वप्नक शीशमहल जे
उठलै अन्हर विर्रो ढहि गेलै नयना
नओतल आफत आबति रहलै
चुप्पे सभ किछु सहि गेलै नयना
~> मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।
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