भुईल नई सकलौ हम प्रिय अहाँके
भुईल नई सकलौ हम प्रिय अहाँके ।
याद अखनो बड़ अाबैए प्रिय अहाँके।
प्रेममे धोखा हमरा दऽ प्रिय गेलौ कहाँ ।
जीअ नै देलौ प्रिय बताह बनादेलौ अहाँ ।
ईजोर जिनगीमे अन्हार कऽ गेलौ अहाँ ।
जिनगीके सबटा सपना तोड़ कऽ गेलै अहाँ ।
चाहलौ प्रिय हम अहाँक जान परानसँ ।
छोडी़क प्रिय अहाँ चैलगेलौ बड़ गुमानसँ ।
प्रेम नई करवाक छल तँ प्रेम नई कैरतौ अहाँ ।
प्रेमक खेल खेलक बड़ अपराध कैनौ अहाँ ।
✍कलमदेब महतो
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