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नाव फंसल मंझधार

।।नाव फंसल मंझधार।।
मैथिलि गीत

छैय नाव फंसल मंझधार ,
नय आश जे लागतै पार।
जॅ रीत दहेज के चैलते रहत,
बिन बात ला बेटी मैरते रहत।
सगरो छैय मचल हाहाकार,
नय आश जे लागतैय पार।
किया अकर अना अपमान हेतैय,
किया कोंइखे मे बेटी के जान जेतैय।
किया पाथर भेलैय या करेज,
खाउ सपत नय लेब दहेज।
नय बेटी के अपमान करू,
बेटी लक्ष्मी सम्मान करु।
बेटी सासुर मे किया जऽरय छय,
किया दुख प्रतारना सहैय छय।
किया राछस बनल छय लोक,
नस नस मे धुसल छय लोभ।
नय टका दहेज ला भुत बनु,
बेटी छय सीता ज्ञान करू।
जीबते मे जीबन स्वग॔ बनत,
जॅ अंगना बेटी हंसत खेलत।
फेर कहब इ मिथिला महान,
जग जानतै जागतै जहान।
जॅ आईग दहेज के बुझि जेतैय,
मंझधारो मे रस्ता सुझि जेतैय।
।।।दहेज भगाबु बेटी बचाबु।।।

।।सुबोध।। जी


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