राखि अजरतर फोटों निहांरैत गेलहुँ हम
🌷🌷मैथिलि ग़ज़ल 🌷🌷
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दोसर के तकलिप सँ उवारैत गेलहुँ हम।
हंसैत खेलैत जिनगी सँ हारैत गेलहुँ हम।।
हुनक एक मुस्कि लेल बेहाल रहौ हम मिता।
अपन सब शौख सिहन्ता जारैत गेलहुँ हम।।
कठोर शब्द बोलि जमीन स गीडौलकै जखन।
हंसैत-हंसैत ओ गर्दा के झारैत गेलहुँ हम।।
होइत अछी अवसोंच मुदा दोख अछी केकर।
प्रेमक हरेक एक पन्ना फारैत गेलहुँ हम।।
खतम भैलै सब बात जँ छुटलै ओकर साथ।
राखि अजरतर फोटों निहांरैत गेलहुँ हम।।
सरलवार्णिक वहर
वर्ण १८
लेखकः-✍ राजदेव राज
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| फोटो फ़ेसबुक सँ |
दोसर के तकलिप सँ उवारैत गेलहुँ हम।
हंसैत खेलैत जिनगी सँ हारैत गेलहुँ हम।।
हुनक एक मुस्कि लेल बेहाल रहौ हम मिता।
अपन सब शौख सिहन्ता जारैत गेलहुँ हम।।
कठोर शब्द बोलि जमीन स गीडौलकै जखन।
हंसैत-हंसैत ओ गर्दा के झारैत गेलहुँ हम।।
होइत अछी अवसोंच मुदा दोख अछी केकर।
प्रेमक हरेक एक पन्ना फारैत गेलहुँ हम।।
खतम भैलै सब बात जँ छुटलै ओकर साथ।
राखि अजरतर फोटों निहांरैत गेलहुँ हम।।
सरलवार्णिक वहर
वर्ण १८
लेखकः-✍ राजदेव राज

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