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जितिया विशेष गीत

▶ जितिया विशेष गीत: ____________________________
होइत छै जितिया पावनि बड्ड भारी ना
सभ बरख करथि मिथिला केर नारी ना
दाइ गे बिनु खएने पिने अन्न- पानि ना..

अरबा- अरबाइन खाय छथि नहा सप्तमीके
व्रत ई राखथि आशिन कृष्ण-पक्ष अष्टमीके
एहिमे अइहव-वीधव दुनूक सहकारी ना
होइत छै जितिया पावनि बड्ड भारी ना
सभ बरख करथि मिथिला केर नारी ना
दाइ गे बिनु खएने पिने अन्न- पानि ना..

झिमनि पात पर खइर, सरिसोक तेल चढ़ावै
केरा,खीरा,पान-मखान संग धूप-दीप जराबै
नवेदमे चाहबे करी अक्षत,पान,सुपारी ना
होइत छै जितिया पावनि बड्ड भारी ना
सभ बरख करथि मिथिला केर नारी ना
दाइ गे बिनु खएने पिने अन्न-पानि ना...

संतानकेर दिर्घायु, मनोरथ पूरा करबाक वरदान
दैत छथि राजा शालिबाहनक पुत जीमूतबाहन
नवमीके विसरजन क' खाय प्रसादी ना
होइत छै जितिया पावनि बड्ड भारी ना
सभ बरख करथि मिथिला केर नारी ना
दाइ गे बिनु खएने पिने अन्न-पानि ना..
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© विद्यानन्द वेदर्दी
राजविराज,सप्तरी
हाल: विराटनगर,मोरङ्ग

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