बड निक लगैए हमरा मिथिलानी !!
अहाँ छी चनचल गुड़िया मिथिलाके ,
मिथलानी हवे अहाँक नाम !
बढ़ैबहो सगरो जगमें माई-बाबूके मान ,
मिथिलाके धिया सिताके सामान !!
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| फोटो google सँ |
देखिकऽ आहाँक एहन स्वरुप ,
तरसैए गगनके चानकऽ नुर !
हरियर कनचन अछि अहाँक रूप ,
जेहन हरियर सजल छै काश्मीर !!
बाबुके अप्पन दुलरैतिन बनि ,
लिय माईसँ अपना गुण !
भैयाके अपन जान बनि ,
निभा दिय मिथिलाके सब रित !!
दिनके दुपहरियामें उगल भोरकऽ किरण ,
फुल जेहन फुलैत रहु अहाँ नितदिन !
रूप आहाँक लगैए सोना चानी ,
हाय रे - हाय रे बौवा मिथिलानी !!
आँखि लगैए हिरणके जेहन ,
गजब सजल या ठोरहमें लाली !
माथ पर बिन्दिया हाथमें चुड़ी ,
बड निक लगैए हमरा मिथिलानी !!
लेखक अज्ञात

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