पडलै मैथिल प' भारी बिपैत टारू कोना
मैथिलि गजल
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✍राजदेव राज
माए गै अनहार घर डिबिया बारू कोना।
गगन सँ हम उ चान केर उतारु कोना।।
बर्षों पूरान पुर्खाके निशान जे राखल छै।
लागल छै झोल मोकरा हम झारू कोना।।
छोडि संस्कार झुमल छै सब नव उमंग में।
ई रेडिमेड फैशन केर हम जारु कोना।।
आन,मान,शान सब विलुप्त भेलौ गे माए।
भरल सभा मे अंगद चरण गारु कोना।।
किनका आब कहू के सूनतै राजक' बात।
पडलै मैथिल प' भारी बिपैत टारू कोना।।
लेखकः✍राजदेव राज
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माए गै अनहार घर डिबिया बारू कोना।
गगन सँ हम उ चान केर उतारु कोना।।
बर्षों पूरान पुर्खाके निशान जे राखल छै।
लागल छै झोल मोकरा हम झारू कोना।।
छोडि संस्कार झुमल छै सब नव उमंग में।
ई रेडिमेड फैशन केर हम जारु कोना।।
आन,मान,शान सब विलुप्त भेलौ गे माए।
भरल सभा मे अंगद चरण गारु कोना।।
किनका आब कहू के सूनतै राजक' बात।
पडलै मैथिल प' भारी बिपैत टारू कोना।।
लेखकः✍राजदेव राज

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