अपने जिनगी क ख़ुशी गाँबा लेलि हम
धत्त तेरी.. ई केहेन काम केलि हम ,
अपने आप ई सज़ा लेलि हम !
दोसरा के प्रेम पाब के लीलसा मे ,
अपने जिनगी क खुशी गँबा लेलि हम !
सूत्बो करै छेली राईत भर नीन्द स्,
अपने करणी स् नींदों ऊरा लेलि हम !
दीनो क् नै पाबैछी चैन आब कखनो ,
दील चोराब के चाह मे चैन हरा लेलि हम !
उब्र त दिय ई गल्ती दोहोराक नै करबै ,
अपन नासमझ दील के समझा लेलि हम !
लेखकः✍राम शंकर दास
लहान ,सिरहा,नेपाल
अपने आप ई सज़ा लेलि हम !
दोसरा के प्रेम पाब के लीलसा मे ,
अपने जिनगी क खुशी गँबा लेलि हम !
सूत्बो करै छेली राईत भर नीन्द स्,
अपने करणी स् नींदों ऊरा लेलि हम !
दीनो क् नै पाबैछी चैन आब कखनो ,
दील चोराब के चाह मे चैन हरा लेलि हम !
उब्र त दिय ई गल्ती दोहोराक नै करबै ,
अपन नासमझ दील के समझा लेलि हम !
लेखकः✍राम शंकर दास
लहान ,सिरहा,नेपाल

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