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केना भोर किरिणीय बहुसी गेलै

केना भोर किरिणीयां बहुसि गेलै,
मोर पैर पैजनियां छनकि गेलै।
सखि! पियाजी सिनेहिया गाँम एथिन
मोर आंखिक नींदिसया ऊचटि गेलै।
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भेल मोन मगन, हेतै पिया दर्शन,
अछि पिया सँ मिलन लेल आतुर मन।
सोचि सुमिर ओ छन, हिया हुलसि गेलै।
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पिया जँ अउथिन, झूमका लौउथिन।
फेर अपनहि हाथे पेहरौथिन।
जे ओ छूथिन हमर तन
झिझकि गेलै।
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हम करब श्रृगांर पिया रीझि जेथिन,
सखि! प्रेम सिनेह ओ बरसौथिन।
साटि लेथिन करेज हिया धडकि गेलै।
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कोन बिधना हमर कपार लिखल,
मोर पिया जी 'सुबोध' परदेस बसल।
मोर नव यौवन तन बिलखि गेलै।
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-✍सुबोध चौधरी-
हरिपुर, गुरमाहा ।

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