वो तहियो करैथ इन्कार
वो तहियो करैथ इन्कार
हुनका लेल आइयो छि बेकार
तैयो बुझैत छि हुनके हम
छैथ उवेह हमर जीवन के आधार ।।
भैर भैर दिन बैसि हुनके पास
टुटी गेल हमर वो नेहक तार
तैयो बुझैत छि हुनके हम
छैथ उवेह हमर जीवन के आधार ।।
बदैल गेलइ वो समय साल
छुइट गेल फेर हुनकर साथ
तैयो बुझैत छि हुनके हम
छैथ उवेह हमर जीवन के आधार।।
✍बिजय कुमार झा
देवडिहा, जनकपुर , मिथिला - नेपाल
प्रबास : नोएडा, उत्तर प्रदेश - भारत
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