आह परदेस गेली पिया
हँसा के गेली त खखनों कना के गेली पिया!
यहाँ हमरा नयन में नोर बना के गेली पिया!!
नै संगे रहे के रहे त किया झुठो के मन टोईली!
परदेस जाईतों बेरा हमरा जना के गेली पिया!!
भलहिं ओछान में हमरा यहाँ सुतले छोईर दिति!
सोहागीन रातके बोली पटर पटर सुना के गेली पिया!!
बितल नै रहे हफ्तों कोना,क हमर मतिया मारलि यहाँ!
हमर हाँथ,क नरम चुरी खन्न खन्ना के गेली पिया!!
✍सुरज कुमार प्रीतम जी
सिनुरजोडा़ ७. धनुषा
हाल (मलेशिया)
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