आह जीवन बिताबी सोलह सृङगारमे
आहाके कोना आइ हम राखु अन्हारमे ।
अपने जीवन जखन जीबै छी उधारमे ।
भूल केलै नै केलै, दण्ड भोइग रहल छी
जीन्गी सस्ता महंग बड सौसे बजारमे ।
डेग डगमग करै पैर रुकै नै जमिनपर
कोना साथै अहाँके नैया राखी मझधारमे ।
जीवन हसबै आ कन्बै क्षणैह क्षणमे
हमरा सम्झैय जोकर नै गीन्ती कलाकारमे ।
आबै अन्हर बिहाइर, पूर्वा–पछिया सँगे
खोपरी रहतै कोना, बिन खम्हनी महारमे ।
जीवन जीयब कोना अहि मायाजालमे
बाट मृत्युक ताकि रहल खार छी कतारमे ।
आब एकैह अभिलाशा अइ जीवनसं मीत
आहा जीवन बिताबी सोलह सृङगारमे ।
दिनेश रसिया
लहान
कोई टिप्पणी नहीं