हम नहिं छी क्यो अदना
हम नहिं छी कयो अदना
हम नहिं छी क्यो अदना-२
बरु अति नीच अधम किछु कहि लेब
राखब शिशु पर करुणा
हम नहिं छी.................
नहिं मिसियो भरि बोध
किंतु संतान अहीं के
भरि जग हएत हँसाय
गूँजत नित कान अहीं के
उलहन कत् सूनब भरि जग के
डेबि लिय' सुत कहुना
हम नहिं छी..................
माँ छोड़ि और के आन
पूत पर ध्यान रखै छै
देखल नजरि उठाय
स'ब दियमान रखै छै
अपनहिं सँ पलखति नहिं केकरो
हमर पुरऐत के सपना
हम नहिं छी ...................
राखहु शरण लगाय
अम्ब आँचर नहिं छोड़ब
कतबो दिय' दुत्कारि
किंतु आशा नहिं तोड़ब
बिलटि मरब बिनु माइयक छाहरि
हमर जगह तुअ चरणा
हम नहिं छी....................
बरु अति नीच................
✍अमित पाठक
हम नहिं छी क्यो अदना-२
बरु अति नीच अधम किछु कहि लेब
राखब शिशु पर करुणा
हम नहिं छी.................
नहिं मिसियो भरि बोध
किंतु संतान अहीं के
भरि जग हएत हँसाय
गूँजत नित कान अहीं के
उलहन कत् सूनब भरि जग के
डेबि लिय' सुत कहुना
हम नहिं छी..................
माँ छोड़ि और के आन
पूत पर ध्यान रखै छै
देखल नजरि उठाय
स'ब दियमान रखै छै
अपनहिं सँ पलखति नहिं केकरो
हमर पुरऐत के सपना
हम नहिं छी ...................
राखहु शरण लगाय
अम्ब आँचर नहिं छोड़ब
कतबो दिय' दुत्कारि
किंतु आशा नहिं तोड़ब
बिलटि मरब बिनु माइयक छाहरि
हमर जगह तुअ चरणा
हम नहिं छी....................
बरु अति नीच................
✍अमित पाठक

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