लिहऽ अपन अधिकार
:-:-:- लिहऽ अपन अधिकार:-:-:
नै करु टोपीपऽ विश्वास आस्था ।
आहाँ अपने खोजु अपन रास्ता ।।
नै देलऽ आहाँकऽ स्वायत मधेश ।
छिनु आ बनाऊ स्वराज एक देश ।।
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किया कऽरहल मन-मने धिक्कार।
छिनकऽ लियऽ अपन अधिकार ।।
आब करबे नै करु कनिको विचार ।
छिनकऽ लु अपनअपन अधिकार ।।
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बहुत मधेसी बेटा बनल शहिद ।
किया लैछी प्रदेश मधेस रहित ।।
३ टिपी १ धोतिके नै सुनु बोली ।
बेरबेर मारैयऽ आहाँकऽ गोली ।।
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सदिखन दैयऽ आहाँकऽ धोखा ।
आहाँकऽ अधिकार करैयऽ रोक्का ।।
कतहेक दिन सहिकऽ रहब मुक्का ।।
जे दैयऽ आहाँक बारम्बार धोखा ।।
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रचनाकार एवम् ©:-Ganga
Prasad Kushwaha JN




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