प्रेम जबरदस्ती नै कर होइ छै
:::::::::: 💘 गजल 💘 :::::::::::
मन मिलन सँ प्रेम जबरदस्ती नै कर होइ छै
जे करैत सच्चा प्रेम ओकरा नै डर होइ छै
दूर होइते मन कानैत करेज फाटि जाइ छै
के कहै हृदय भीतर नै प्रेमक घर होइ छै
हवा पानी रौद सब छुटिआएल छै एत मुदा
प्रेम सँन पुण्य चीज के नै जाति थर होइ छै
सुख - दुःख जिनगी केर एक हिस्से टा छै
सदति हँसैत रहू जिनगी के नै भर होइ छै
बसि जाई किनको मनमे सच्चा प्रेम अशरफ़
बस ओकरे याद मे दिन राति दुपहर होइ छै
✍ अशरफ़ राईन
हाँल :दोहा , कतार
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