कलयुगक प्रेम
***कलयुगक प्रेम***
- - - - - - - - - - -
बौआ रौ फूट्ल हमर कपार
जहिया स भेलौ प्यार
हेरौ लगबै कोनो जुगाड़
मुदा अई रोग स उबार
प्रेमक पाठ पढ़ा क छौरि
बनेलकौ अप्पन यार
ओइ छौरि के याद मे बौआ
सदिखन रहैया बुखार
बौआ रै लगबै. . . . . . . . .
अप्पन चर्चा सदिखन करैय,
भांड मे गेलै संसार
मुँह कान ऐश्वर्या सनके
मुदा जरले सन व्यवहार
बौआ रै लगबै . . . . . . . .
मोटरगाड़ी आर हजरिया
कहै सदिखन जेबै बजार
थोड़े-बहुत स मोन नैइ भरै,
कहै, सरधुआ चलै बीअर बार
बौआ रे लगबै. . . . . . . . . .
सब कुकर्म तू करिह बौआ
नैइ परिह एहन बीमार
नै त फुटतौ तोरो कपार
बौआ रै फुटतौ तोरो कपार lll. . . . . .
- ✍रोशन मिश्रा
कोई टिप्पणी नहीं