जब स घर मे येल घरवाली
कनिया (घरवाली )
जब स घर मे येल घरवाली
सुख दुख क मोटा भेल भारी
पैर के पायल हाथ क वाली
निक निकुत खाइ एक थारी
सुन्हत सुन्दर फूल महकारी
भैसुर क देख मारत पिहकारी
लाज बिज क राखैत गोरथारी
कल्यूगके कनिया घमन्डभारी
हमही चि सुन्दर करै बिचार
साउस नन्द स करै त खिचार
नै मान्त ऊ केकरो अधिकार
यी कनिया के लाज नै बिचार
घर के मुखिया पन्च कहाबे
घर के लोक के सन्ख बजाबे
सब तिर्थ के ऊ एक समान
कल्यूग क कनिया येछ महान
लेखक✍काम्बर श्याम
लहान ८(सिरहा)
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