बाल विवाहके बेदना- बच्चा जनमैकाल सेहो हमर बात सुनैवाला कोइनै छेल
बाल विवाहके बेदना- बच्चा जनमैकाल सेहो हमर बात सुनैवाला कोइनै छेल
✍अशोक कुमार सहनी ,
मानव अधिकारके क्षेत्रमें सक्रिय रहल अन्तराष्ट्रिय संस्था हृयुमन राइट्स वाच बालविवाह रोकै के लेल नीक कदम उठाबै के नेपाल सरकारके ध्यानाकर्षण करोलक ।
नेपाल सन् २०३० तक बालविवाह पूरा रूप सँ खत्म करै के प्रतिबद्धता जनेलक सन्दर्भमें सार्बजनिक एक प्रतिवेदनमें बालविवाह रोकै के नेपालमें भरहल काम जादा आ प्रभाव परैवला नै भेल से नतीजा में पूगल अछि ।
बेरस्पितदिन सार्बजनिक केने प्रतिबेदन अनुसार नेपालमें ३७ प्रतिशत बालविवाह भरहल छै । खेलै कुदै नाचै गाबैके दिनमें नेपालमें बालविवाह’ शीर्षकके प्रतिवेदनमें १८ वर्ष नै पूगल विवाह करै के बाध्य नेपाली औरतसबके वेदना लिखने अछि ।
हृयुमन राइट्स वाचके अनुसार नेपालके १४ जिल्लामें केने अध्ययन सँ ई प्रतिवेदन तयार केलगेल अछि। अध्ययनमें भाग लेने इरा श्रेष्ठ नेपालके गाउँसबमें बालविवाहके अवस्था बहुत भयानक भेल बतोलक । ‘बच्चासबके सेहो बच्चा भेल हम देखलौ’ श्रेष्ठ कहलेन।
१८ वर्ष उमेर नैभेल विवाह करैके नेपालमें गैरकानुनी मानै छै । तैयो बालविवाह नै रुकल अछि। डॉक्टर सबके अनुसार २० वर्ष पूरा भेल तब मात्रै विवाह करै सँ माइ आ बच्चा दुनु के स्वास्थ्य नीक रहै छै। कच्चे उमेरमें पेट बोकै सँ माइ आ बच्चा दुनु के जिनगी खतरा में पैराय छै ।
ह्युमन राईट्स वाचके वरिष्ठ अनुसन्धानकर्ता हेदर बार कहै छैय की, ‘ई प्रतिवेदन तयार करै के टाइम में बहुत नेपाली बुच्ची सब दुःख में छेल कैलेय की ओकरासबके बच्चाके मौत भेल छेल ।’
१६ वर्षके उमेरमें माईग के विवाह भेल एक बुच्ची कहै छैय, ‘ बच्चा जनमैकाल सेहो हमर बात सुनैवाला कोइनै छेल'।
हृयुमन राइट्स वाचके प्रतिनिधि भेटलक त उ बुच्चीके चाइर वर्ष बेटी आ डेढ वर्षके बेटा छेल । साथमें ओकर पेटमें ६ महिनाके गर्भ (पेट) सेहो रहल छेल ।
✍अशोक कुमार सहनी
✍अशोक कुमार सहनी ,
मानव अधिकारके क्षेत्रमें सक्रिय रहल अन्तराष्ट्रिय संस्था हृयुमन राइट्स वाच बालविवाह रोकै के लेल नीक कदम उठाबै के नेपाल सरकारके ध्यानाकर्षण करोलक ।
नेपाल सन् २०३० तक बालविवाह पूरा रूप सँ खत्म करै के प्रतिबद्धता जनेलक सन्दर्भमें सार्बजनिक एक प्रतिवेदनमें बालविवाह रोकै के नेपालमें भरहल काम जादा आ प्रभाव परैवला नै भेल से नतीजा में पूगल अछि ।
बेरस्पितदिन सार्बजनिक केने प्रतिबेदन अनुसार नेपालमें ३७ प्रतिशत बालविवाह भरहल छै । खेलै कुदै नाचै गाबैके दिनमें नेपालमें बालविवाह’ शीर्षकके प्रतिवेदनमें १८ वर्ष नै पूगल विवाह करै के बाध्य नेपाली औरतसबके वेदना लिखने अछि ।
हृयुमन राइट्स वाचके अनुसार नेपालके १४ जिल्लामें केने अध्ययन सँ ई प्रतिवेदन तयार केलगेल अछि। अध्ययनमें भाग लेने इरा श्रेष्ठ नेपालके गाउँसबमें बालविवाहके अवस्था बहुत भयानक भेल बतोलक । ‘बच्चासबके सेहो बच्चा भेल हम देखलौ’ श्रेष्ठ कहलेन।
१८ वर्ष उमेर नैभेल विवाह करैके नेपालमें गैरकानुनी मानै छै । तैयो बालविवाह नै रुकल अछि। डॉक्टर सबके अनुसार २० वर्ष पूरा भेल तब मात्रै विवाह करै सँ माइ आ बच्चा दुनु के स्वास्थ्य नीक रहै छै। कच्चे उमेरमें पेट बोकै सँ माइ आ बच्चा दुनु के जिनगी खतरा में पैराय छै ।
ह्युमन राईट्स वाचके वरिष्ठ अनुसन्धानकर्ता हेदर बार कहै छैय की, ‘ई प्रतिवेदन तयार करै के टाइम में बहुत नेपाली बुच्ची सब दुःख में छेल कैलेय की ओकरासबके बच्चाके मौत भेल छेल ।’
१६ वर्षके उमेरमें माईग के विवाह भेल एक बुच्ची कहै छैय, ‘ बच्चा जनमैकाल सेहो हमर बात सुनैवाला कोइनै छेल'।
हृयुमन राइट्स वाचके प्रतिनिधि भेटलक त उ बुच्चीके चाइर वर्ष बेटी आ डेढ वर्षके बेटा छेल । साथमें ओकर पेटमें ६ महिनाके गर्भ (पेट) सेहो रहल छेल ।
✍अशोक कुमार सहनी


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