ललका दुपट्टा
ललका दुपट्टा
✍राजीव कर्ण
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लागय नवतुरिया में साँझ भोर सट्टा
लहरई जखन हुनक ललका दुपट्टा।
कंचन सन देह सिहराबै पोर पोर
ठोर पर लाली मुखड़ा छैन्ह गोर गोर
मुस्की जँ मारैथ चलय देसी कट्टा।
मोरनी सन चाइल छैन्ह गाल गुलाब सन
मदिरायल नैन भरल बोतल शराब सन
हँसि क जँ देखैत त हिल जाई छै सत्ता।
रस्ता निहारैत सब भोर साँझ दिन में
चौराहा बस्तीक अछि सपना हसीन में
लागल कतेक के छै रोजी में बट्टा।
लहरई जखन .............................।
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लेखक✍ राजीव कर्ण।

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