नै जायब ओहि देश
।नै जायब ओहि देश।
छै बढ़ निष्ठुर नेत समाजक,
पग पग लागतै ठेंस।
नै जायब ओहि देश-2
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हमरा जन्मसँ पहिले मारतै,
हमरा देखिक कोंखि ऊजारतै।
हेतै ने कनेको दरेज।
नै जायब ओहि देश....
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ओतऽ दहेजक रीत छै भारी,
बेटा बेचै बनल व्यापारी।
बनल छै मनुखे मलेछ।
नै जायब ओहि देश....
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भुखल देहक दानव सगरो,
निर्भया सन गति हेतै हमरो।
नोचि नोचि खेतै देह।
नै जायब ओहि देश....
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झुठे क दुर्गा काली पुजै,
बेटीकेँ कियो मरम नै बुझै।
घरे घरे मिलै छै कलेश।
नै जायब ओहि देश,
हम नै जायब ओहि देश।
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©सुबोध चौधरी।
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