तोरे मेऽ हेराएल हम पागल रहिती
【 गजल 】
नैन मेऽ तोरा सदिखन साजल रहिती
जऽ आँखिक तोहर हम काजल रहिती
बरसि जेतौ हम मेघक बुन्न बनि कऽ
घनगर कारी केश केऽ बादल रहिती
रहितौ कखनो खन्कैत कखनो छन्कैत
हाथक चुड़ी जऽ गोरक पायल रहिती
यादमेऽ छटपटाईत ओह सँऽ नीक तऽ
तोहरे नेहक घेरा मेऽ बान्हल रहिती
ठोर पऽ अशरफ़ केऽ तोरे नाम रहित
तोरे मेऽ हेराएल हम पागल रहिती
सरल वार्णिक बहार
वर्ण १५
✍ अशरफ़ राईन
सिनुरजोडा ,धनुषा
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| गीता कुमारी सुन्सरी पेज सँ फोटो साभार |
नैन मेऽ तोरा सदिखन साजल रहिती
जऽ आँखिक तोहर हम काजल रहिती
बरसि जेतौ हम मेघक बुन्न बनि कऽ
घनगर कारी केश केऽ बादल रहिती
रहितौ कखनो खन्कैत कखनो छन्कैत
हाथक चुड़ी जऽ गोरक पायल रहिती
यादमेऽ छटपटाईत ओह सँऽ नीक तऽ
तोहरे नेहक घेरा मेऽ बान्हल रहिती
ठोर पऽ अशरफ़ केऽ तोरे नाम रहित
तोरे मेऽ हेराएल हम पागल रहिती
सरल वार्णिक बहार
वर्ण १५
✍ अशरफ़ राईन
सिनुरजोडा ,धनुषा

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