कतौ रहुँ अप्पन गाम नै बिसरू - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

कतौ रहुँ अप्पन गाम नै बिसरू

कतौ रहुँ अप्पन गाम नै बिसरू


✍विधानन्द बेदर्दी
कतौ रहुँ अप्पन गाम नै बिसरू
स्वर्गो सँ सुन्नर ठाम नै बिसरू॥,

कन्हा पर गमछा,माथ पर पाग
धोती-कुर्ता परिधान नै बिसरू॥,

दश्मी,दियाबाती,बकर ईद,होरी
सङ्गमे पर- पकवान नै बिसरू॥,

माछ-मखान त' खेबेटा करियौ,
दही,चुरा,चिन्नी,आम नै बिसरू॥

प्राती,सोहर,समदाउन,झिझिया
जन्म सँ मरणके गान नै बिसरू॥

मिथिलामे रह' वाला सब मैथिल,
जाति-पातिमे मिलान नै बिसरू॥

चाहे भोज हो या उत्सव कोनो,
खाय लेल अहाँ पान नै बिसरू॥

अप्पन सँस्कृति-अप्पन अस्तित्व,
जा जिबी कर' उत्थान नै बिसरू॥
* * *
_✍ विधानन्द बेदर्दी

कोई टिप्पणी नहीं