परदेशी सब त भुइल गेल छै रस्ता उ गाम के...! - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

परदेशी सब त भुइल गेल छै रस्ता उ गाम के...!


परदेशी सब त भुइल गेल छै रस्ता उ गाम के...!

कागज़े में छै राखल आब उ चेहरा गाम के,
मुदा देखाइ ने दैछै अखनो उ चेहरा गाम के।

सुख में,दुख में,धूप में जे माथपर नज़र आबै छेल,
हेरा गेलै  नै जानि कत उ लाल गमछा गाम के।

आबैत-जाईत पूछै छेल सबकोई के हालचाल,
भगेलै किया चुप-चाप उ पीपर पुरनका गाम के ।

जबसे उ गेलै छोइडके परदेस उ दलान के,
अखनो राह तकै छै ओकरा उ बिछौना गाम के ।

साझ के चौबटिया में  की होइछल हला-गुला,
खाली याद में बाँचल छै अब उ किस्सा गाम के।

हॉल-चाल आब एक-दोसर के केपूछै छै कोई नै,
की पता अगिला साल की हेत आब उ गाम के।

माई के आइख में अखनो आश अछि उ करै की,
परदेशी सब त भुइल गेल छै रस्ता उ गाम के...!

✍अशोक कुमार सहनी
लहान ४ रघुनाथपूर
हॉल- (दोहा क़तार)

कोई टिप्पणी नहीं