प्रेमक बरखा बरसै छै - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

प्रेमक बरखा बरसै छै

प्रेमक बरखा बरसै छै 


✍मनीष झा 
प्रेमक बरखा बरसै छै , तन - मन रहि रहि सिहरै छै
जल्दी आऊ सजनी आहाँ देखियौ जियरा धड़कै छै
धधकि रहल जे आगि मोन मे ओकरा आऊ मिझाबी यै - २
प्रेमक बरखा बरसै छै ....

पागल बना देलक हमरा मधु सँ भरल ई आँखि यै
मधुशाला छी आहाँ सजनी जीवन के हमर साथी यै
हाथ पकड़ि एक दोसर के एक दोसर मे साटि लिय'
जीवन भरि नहि छोड़ब हाथ आहाँ एकटा वचन दिय'
पवन प्रीत के बहैत रहै आ संग संग सावन झहरै छै -२
प्रेमक बरखा बरसै छै .....

" मोन   मयूरा    नाचै      ---   बादल  थपड़ी  मारै ''
" हिया सँ निकलै आह यै ---  प्रेम धार नहि थाह यै " ।।

बटगमनी  सन  मधुर  प्रेम  आ  झिझिया सन  सुन्दर यै
कोइली सन के बोल एकर कुहकै कू - कू कण - कण यै
प्रेम रोग सन रोग कोनो नहि युग - युग सँ सब देखि रहल
सत्य प्रेम  एहि दुनियाँ मे  सदिखन सजनी छै जीत  रहल
सप्पत  कहै छी मोन ई हमरो ओहने प्रेम लए तड़पै छै - २
प्रेमक बरखा बरसै छै .....

" प्रीतक  मुरली  बाजै   ---  मधुर - मधुर सन लागै "
" प्रेम हारि नहि मानै छै  ---  क'  लए छै जे ठानै छै " ।।

पुछियौ लता - पता सँ आ  एहि ऋतु चारु सँ पुछियौ यै
प्रेमक निधि सँ भरल - पुरल छै हम्मर आँगन देखियौ यै
आस  लगा क'  बैसल छी  झट सँ आहाँ  चलि आऊ ने
आबि हमरे संग रहि जाऊ कत्तहु आहाँ फेर जाऊ नहि
दुनियाँ के जँ सुनबै से जग प्रेमी के सदिखन कनबै छै - २
प्रेमक बरखा बरसै छै .....

" जो रे बरखा तू ओहि गां --- सजनी हम्मर छथि जाहि ठां "
" झमकि - झमकि क बरसै ---   पाइन   नेह  के   परसै " ।।

प्रेमक बरखा बरसै छै , तन - मन रहि रहि सिहरै छै
जल्दी आऊ सजनी आहाँ देखियौ जियरा धड़कै छै
धधकि रहल जे आगि मोन मे ओकरा आऊ मिझाबी यै - २
प्रेमक बरखा बरसै छै ....

                             ••••••
                           ...✍ मनीष झा

कोई टिप्पणी नहीं