मिथला में दुर्गा मंदिर पर पूजा आ साँझ-बाती
मिथला में दुर्गा मंदिर पर पूजा आ साँझ-बाती
<><><><><><><><><><><><><><><><>
✍अशोक कुमार सहनी
धन्य अछि मिथिला! धन्य अछि मैथिल नारी! जे अपन मिथिला धन-धान्य सुख शांति वैभव सौं भरल पूरल अछि । ओना त संपूर्ण मिथिला में धर्मक रीढ छथि लक्ष्मी स्त्री किन्तु मैथिल स्त्रीक लक्ष्मी स्वभाव त समस्त संसार में अतुलनीय अछि । मिथिलाक गाम-गाम ,घर-घर में दुर्गा पूजा हर्षोल्लास सौं जौं भय रहल अछि अहि में मैथिल स्त्रीक संपूर्ण श्रद्धा सौं योगदान अछि तें संभव । दुर्गापूजा नहिं अपितु जतेक भी पूजा-पाठ पावैन-तिहार अपन मिथिला में बचल अछि एकर संपूर्ण श्रेय मैथिलानिक छन्हि। मैथिल लक्ष्मी स्त्री में आजूक सनातन धर्मक प्राण अछि।
ओना त नितदिन मैथिलानि धर्म कार्य में अग्रणी रहि मिथिला में धर्मक ज्योति जरबै छथि किन्तु दुर्गा पूजा में बूढ-सूढ कनिञा-बहूरिया छोट-पैघ बचिया सब मिलि मिथिला में धर्मक ज्योति त जरबैते छथि संगहि ज्वाला बनि अधर्मक नाश आ धर्मक रक्षा सेहो करै छथि।
दुर्गापूजा में भोरेभोर पवित्र सौं स्नान कय फूल दुबि आदि इकठ्ठा कय माटिक महादेव बना फुलडाली में फूल बाती सजा चंगेरा में माटिक बनल महादेव लय झुण्ड के झुण्ड सखी बहिनपा संग दुर्गा मंदिर पहुँची महादेव पुजारी के अर्पण कय अत्यधिक श्रद्धा सौं माँ जगदम्बाक पूजा तल्लीन भय करई छथि । पुन: साँझखन माटिक दिवारी भगवतीक गीत गुनगुनैत बना सब सखी सहेली संग मंदिर पर पहुँच माता के धूप-दीप जरा हृदयंगम भय साँझ-बाती करै छथि।
जखन मैथिलानि सखी बहिनपा संग सोलहो श्रृंगार कय रंग विरंगक वस्त्राभूषन सौं लैस भय हाथ में फुलडाली लय मंदिरक प्रांगण में प्रवेश करै छथि त मंदिरक छटा अलौकिक भय जाईत अछि। किए नै हेत मनोहारी दृश्य जखन जननी सब जगजननी के पूजा करती त अलौकिकता अवश्यंभावी।जखन सबमिली माता के धूप-दीप जरबै छथि त दृश्य देखि मंत्रमुग्ध भेने बिना नहिं रहि पायब।अद्भुत दृश्य।
जय माँ अम्बे! आहाँ के कोटि-कोटि प्रणाम!
जय हे मैथिल स्त्री मिथिला में धर्मक ज्योति जरबै लेल अहूँ के कोटि-कोटि प्रणाम!!
जय मिथिला जय मैथिल जय मैथिली
मिथिला पेज सँ साभार
<><><><><><><><><><><><><><><><>
✍अशोक कुमार सहनी
धन्य अछि मिथिला! धन्य अछि मैथिल नारी! जे अपन मिथिला धन-धान्य सुख शांति वैभव सौं भरल पूरल अछि । ओना त संपूर्ण मिथिला में धर्मक रीढ छथि लक्ष्मी स्त्री किन्तु मैथिल स्त्रीक लक्ष्मी स्वभाव त समस्त संसार में अतुलनीय अछि । मिथिलाक गाम-गाम ,घर-घर में दुर्गा पूजा हर्षोल्लास सौं जौं भय रहल अछि अहि में मैथिल स्त्रीक संपूर्ण श्रद्धा सौं योगदान अछि तें संभव । दुर्गापूजा नहिं अपितु जतेक भी पूजा-पाठ पावैन-तिहार अपन मिथिला में बचल अछि एकर संपूर्ण श्रेय मैथिलानिक छन्हि। मैथिल लक्ष्मी स्त्री में आजूक सनातन धर्मक प्राण अछि।
ओना त नितदिन मैथिलानि धर्म कार्य में अग्रणी रहि मिथिला में धर्मक ज्योति जरबै छथि किन्तु दुर्गा पूजा में बूढ-सूढ कनिञा-बहूरिया छोट-पैघ बचिया सब मिलि मिथिला में धर्मक ज्योति त जरबैते छथि संगहि ज्वाला बनि अधर्मक नाश आ धर्मक रक्षा सेहो करै छथि।
दुर्गापूजा में भोरेभोर पवित्र सौं स्नान कय फूल दुबि आदि इकठ्ठा कय माटिक महादेव बना फुलडाली में फूल बाती सजा चंगेरा में माटिक बनल महादेव लय झुण्ड के झुण्ड सखी बहिनपा संग दुर्गा मंदिर पहुँची महादेव पुजारी के अर्पण कय अत्यधिक श्रद्धा सौं माँ जगदम्बाक पूजा तल्लीन भय करई छथि । पुन: साँझखन माटिक दिवारी भगवतीक गीत गुनगुनैत बना सब सखी सहेली संग मंदिर पर पहुँच माता के धूप-दीप जरा हृदयंगम भय साँझ-बाती करै छथि।
जखन मैथिलानि सखी बहिनपा संग सोलहो श्रृंगार कय रंग विरंगक वस्त्राभूषन सौं लैस भय हाथ में फुलडाली लय मंदिरक प्रांगण में प्रवेश करै छथि त मंदिरक छटा अलौकिक भय जाईत अछि। किए नै हेत मनोहारी दृश्य जखन जननी सब जगजननी के पूजा करती त अलौकिकता अवश्यंभावी।जखन सबमिली माता के धूप-दीप जरबै छथि त दृश्य देखि मंत्रमुग्ध भेने बिना नहिं रहि पायब।अद्भुत दृश्य।
जय माँ अम्बे! आहाँ के कोटि-कोटि प्रणाम!
जय हे मैथिल स्त्री मिथिला में धर्मक ज्योति जरबै लेल अहूँ के कोटि-कोटि प्रणाम!!
जय मिथिला जय मैथिल जय मैथिली
मिथिला पेज सँ साभार



कोई टिप्पणी नहीं