दशैं पर्व बडामहान ( मैथिली कविता )
***** दशैं पर्व बडामहान ******
हिन्दुसबके दशैं पर्व बडामहान ।
सजि गेल अपन शहर लाहान ।।
नवनव वस्त्रमे सब लागै समान ।
माँऽ दशहरा करथिन कल्याण ।।
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चम्कै सब कियो वस्त्रकऽ रौनकसँ ।
मन प्रसन्न अछि दसैंकऽ रमझमसँ ।।
होस-बेहोस हरायल अछि आनन्दसँ ।
खुसी बाँकी नै रहल अछि सहर्षसँ ।।
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मन्दिरमे गमगम गमकै अगरबत्ती ।
भीड भक्तके दर्शन ल्या भगवती ।।
आय सब क्यों प्रसन्न आ हर्षित ।
शुभ-आशिर्वाद देथिन माँ दुर्गेश्वरी ।।
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सब क्यों करैछथि माँ दुर्गाकऽ प्रणाम ।
मुखारविन्दसँ सुनी माँ दुर्गाकऽ नाम ।।
आशिर्वाद दऽकऽ माँ करथिन सम्मान ।
संस्कार आ संस्कृतिसँ सम्पन्न नेपाल ।।
रचनाकार & ©:- गंगा प्रसाद कुशवाहा 'जेएन'
मिति:- २०७०/०६/२६ गते शनिदिन
कविता नं.:- १७
दशै बिशेश
हिन्दुसबके दशैं पर्व बडामहान ।
सजि गेल अपन शहर लाहान ।।
नवनव वस्त्रमे सब लागै समान ।
माँऽ दशहरा करथिन कल्याण ।।
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चम्कै सब कियो वस्त्रकऽ रौनकसँ ।
मन प्रसन्न अछि दसैंकऽ रमझमसँ ।।
होस-बेहोस हरायल अछि आनन्दसँ ।
खुसी बाँकी नै रहल अछि सहर्षसँ ।।
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मन्दिरमे गमगम गमकै अगरबत्ती ।
भीड भक्तके दर्शन ल्या भगवती ।।
आय सब क्यों प्रसन्न आ हर्षित ।
शुभ-आशिर्वाद देथिन माँ दुर्गेश्वरी ।।
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सब क्यों करैछथि माँ दुर्गाकऽ प्रणाम ।
मुखारविन्दसँ सुनी माँ दुर्गाकऽ नाम ।।
आशिर्वाद दऽकऽ माँ करथिन सम्मान ।
संस्कार आ संस्कृतिसँ सम्पन्न नेपाल ।।
रचनाकार & ©:- गंगा प्रसाद कुशवाहा 'जेएन'
मिति:- २०७०/०६/२६ गते शनिदिन
कविता नं.:- १७
दशै बिशेश





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