सभ पबनैतिन मिलक' घाट सजाउ यौ
सभ पबनैतिन मिलक' घाट सजाउ यौ
✍मैथिल प्रशान्त
अरघकेँ बेरिया नञि बितै
घरसँ बहराउ यौ ।
सभ पबनैतिन मिलक'
घाट सजाउ यौ ।।
हम त' नहाय-खाय,
रखलौं वरतिया ।
एहिबात सलामत रहय,
आबय ने कोनो बिपतिया ।।
कल जोड़ि विनती करी,
देर ने लगाउ यौ ।
मनोरथ हमरो छठि माय ,
करथिन्ह अबस्से पूरा ।
घीकेर दीप जरेलौं,
ढौरल सभटा कूरा ।।
केराक घौड़ लय,
हाथ उठाउ यौ ।
गामक जे पूब बाध ,
उगला सुरूज देब ।
मैथिल प्रशान्तके माहे ,
कहिया अहाँ सुधि लेब ।।
राखू भरोसा मापर,
माकेँ गुण गाउ यौ ।
~> ✍मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।
✍मैथिल प्रशान्त
अरघकेँ बेरिया नञि बितै
घरसँ बहराउ यौ ।
सभ पबनैतिन मिलक'
घाट सजाउ यौ ।।
हम त' नहाय-खाय,
रखलौं वरतिया ।
एहिबात सलामत रहय,
आबय ने कोनो बिपतिया ।।
कल जोड़ि विनती करी,
देर ने लगाउ यौ ।
मनोरथ हमरो छठि माय ,
करथिन्ह अबस्से पूरा ।
घीकेर दीप जरेलौं,
ढौरल सभटा कूरा ।।
केराक घौड़ लय,
हाथ उठाउ यौ ।
गामक जे पूब बाध ,
उगला सुरूज देब ।
मैथिल प्रशान्तके माहे ,
कहिया अहाँ सुधि लेब ।।
राखू भरोसा मापर,
माकेँ गुण गाउ यौ ।
~> ✍मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।

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