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छठि गीत मैथिलि

छठि मैथिलि गीत
       
     
        
✍शिव कुमार झा टिल्लू

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छठिहे' हरु मोनक सभदोख हीया संतोखसँ भ'रू ना !!
भगत ठाढ़ अछि मोख कृपाक' भीतर क'रू ना !
दिनक उपासल खरना कयलहुँ लेसलहुँ संझा दीप
उदयाचलक उषासँ पहिने लेलहुँ घाटकेँ नीप
दियौ तुष्टि- ग्रास आशीष विदाके' बेरि'ने बिसरू ना
बेरि'ने बिसरू ना आशीषक बिना'ने ससरू ना
छठिहे' हरु मोनक सभदोख हीया संतोखसँ भ'रू ना !!
फलप्रसाद राति जागि संजोगल व्याधिल देह ने निन्न
हे माता ! तृष्णाक हाहिबिच स्पंदन बिनबिन
क्षणमे हंसी क्षणे बहिरहल ई नश्वर दृष्टिसँ अश्रु ना
अहाँने बिसरू ना मातृशक्ति बनि पसरू ना
छठिहे' हरु मोनक सभदोख हीया संतोखसँ भ'रू ना !!
चीन्हि'ने सकलहुँ सार्थक जीवन बाँचल यति विश्राम
आब अशेष'ने रास रहल अछि सोझाँ शेष विराम
सुनू हे ! याचन अंतिम याम मैथिली मिथिघर भ'रू ना
मिथिघर भ'रू ना रिक्त मयनाघर भ'रू ना
छठिहे' हरु मोनक सभदोख हीया संतोखसँ भ'रू ना !!

गीतकार ✍शिव कुमार झा टिल्लू

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