अपन मिथिला में शुभ आ सफलताके प्रति निलकण्ठके दर्शन करैत आय
अपन मिथिला में शुभ आ सफलताके प्रति निलकण्ठके दर्शन करैत आय
✍अशोक कुमार सहनी,,अपन मिथिला । २५ असोज । आय विजया दशमीके दशम दिन अपन मिथिला में निलकण्ठ चिरैय के दर्शन करैत अछि ।
दसमी सुरु भेल दिनसँ सब दिन देवी दुर्गा भवानीके पूजा -पाठ कैरक दशम दिन निलकण्ठ चिरिया दर्शन करै के परम्परा रहैत ऐल अछि । रोलर बर्डके नामसँ चिन्हेवला ई चिरिया के दर्शन सँ पूरावर्ष शुभ रहत आ सब काममें सफल मिलत से आदमीके विश्वाश रहल अछि ।
अपन मिथिलामें बड़का गाछसब में खोता बनाके रहल ई चिरिया देवो के देव महादेवके स्वरुपके रुपमें सेहो मानैत अछि । निलकण्ठ के दर्शन करैतकाल शीर झुका के प्रणाम करै सँ पूरावर्ष सब क्षेत्रमें जय–विजय हैय से कामना करैत् अछि । आइके दिन गाम- घरमे बच्चा सँ बुढ़वा तक भोरे उइठके निलकण्ठके दर्शन कर जाय छै।
हिन्दू धर्मग्रन्थमें भगवान श्रीराम निलकण्ठ चिरैके दर्शन कके मात्र रावणके हरने छेल ई गर्थ में उलेख अछि । अर्थात यतेक बिसाल शक्तिमान रावणके मारैसे पहिले नीलकण्ठ चिरैके दर्शन केने छेल तब् मात्र शुभ दिन अर्थात सफल भेल छेल से आदमीसब के विसवास अछि । धर्मशास्त्रमें सेहो भगवान शिवके निलकण्ठ मनेने अछि । ओहि अनुसार नीलकण्ठके ई युगमें भगवान शिवके प्रतिनिधिके रुपमें मानल गेल बढ़ावा सब के तर्क अछि ।
रङ्गीविरङ् ई चिरैके गर्दन भगवान शिवके जेका काल भेल आदमी के विस्वास अछि । ई चिरैके असगरे रहै लेल मन परै छै। बितल कुछ बर्ष में गिरहतसब धान खेतमें किरा मारै केलेल प्रयोग करहल किटनाशक दबाई प्रयोग करै से मरल किरा पतिंगा खाके आ किटनाशक दबाई के प्रयोगसे आहार (खान) नै मिलै से निलकण्ठ चिरै के संख्या घटैत गेल अछि ।
✍अशोक कुमार सहनी
✍अशोक कुमार सहनी,,अपन मिथिला । २५ असोज । आय विजया दशमीके दशम दिन अपन मिथिला में निलकण्ठ चिरैय के दर्शन करैत अछि ।
दसमी सुरु भेल दिनसँ सब दिन देवी दुर्गा भवानीके पूजा -पाठ कैरक दशम दिन निलकण्ठ चिरिया दर्शन करै के परम्परा रहैत ऐल अछि । रोलर बर्डके नामसँ चिन्हेवला ई चिरिया के दर्शन सँ पूरावर्ष शुभ रहत आ सब काममें सफल मिलत से आदमीके विश्वाश रहल अछि ।
अपन मिथिलामें बड़का गाछसब में खोता बनाके रहल ई चिरिया देवो के देव महादेवके स्वरुपके रुपमें सेहो मानैत अछि । निलकण्ठ के दर्शन करैतकाल शीर झुका के प्रणाम करै सँ पूरावर्ष सब क्षेत्रमें जय–विजय हैय से कामना करैत् अछि । आइके दिन गाम- घरमे बच्चा सँ बुढ़वा तक भोरे उइठके निलकण्ठके दर्शन कर जाय छै।
हिन्दू धर्मग्रन्थमें भगवान श्रीराम निलकण्ठ चिरैके दर्शन कके मात्र रावणके हरने छेल ई गर्थ में उलेख अछि । अर्थात यतेक बिसाल शक्तिमान रावणके मारैसे पहिले नीलकण्ठ चिरैके दर्शन केने छेल तब् मात्र शुभ दिन अर्थात सफल भेल छेल से आदमीसब के विसवास अछि । धर्मशास्त्रमें सेहो भगवान शिवके निलकण्ठ मनेने अछि । ओहि अनुसार नीलकण्ठके ई युगमें भगवान शिवके प्रतिनिधिके रुपमें मानल गेल बढ़ावा सब के तर्क अछि ।
रङ्गीविरङ् ई चिरैके गर्दन भगवान शिवके जेका काल भेल आदमी के विस्वास अछि । ई चिरैके असगरे रहै लेल मन परै छै। बितल कुछ बर्ष में गिरहतसब धान खेतमें किरा मारै केलेल प्रयोग करहल किटनाशक दबाई प्रयोग करै से मरल किरा पतिंगा खाके आ किटनाशक दबाई के प्रयोगसे आहार (खान) नै मिलै से निलकण्ठ चिरै के संख्या घटैत गेल अछि ।
✍अशोक कुमार सहनी



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