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मिथिलाक जयन्ती विसर्जन आ दुर्गा मैया के बिदाई

मिथिलाक जयन्ती विसर्जन आ दुर्गा मैया के बिदाई
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      आई मिथिलानि हलभोरे उठि स्नान ध्यान कय दही-चूड़ा-चीनी सौं गोसाऊनिक भोग लगा श्रद्धा सौं पूजा अर्चना करैत छथि। पुरूष जे दुर्गा सप्तशतीक पाठ करै छलाह स्नान कय लाल पियर धोती पहिर गोसाऊनिक घर एलाह। पाठ त कालिए खन समापन भय चुकल छल किएक त मैयाक होमक बाद लगभग दुर्गा पूजाक आंशिक समापन भय जाईत अछि। पाठकर्ता पूरूष  लाल पियर धोती पहिरि भगवतीक प्रणाम कय शांती कलश ऊठा बगल में राखि पवित्र छूरी हांसू सौं ध्यापपूर्वक जयन्ती कटैत छथि। जयन्ती काटि पहिल गोसाऊन के चढबैत छथि पुनः सपरिवार के माथ पर जयन्ती चढाओल जाईत अछि।शांति कलशक जल! ओही पल्लव सौं सपरिवारक माथ पर छिटैत संपूर्ण घर दुआइर में छिटि पवित्र करै छथि अर्पण केल दही चूड़ा चीनी सपरिवार प्रसाद रूप में ग्रहण करै छथि।


                   भगवती मंदिर में ओहिना माता के दही-चूड़ा के भोग अर्पण कय साविध पूजा कय जजमान जयन्ती काटि भगवती के चढा सब भक्तगणक माथ पर जयन्ती चढवैत छथि आ आयल भक्तगणक ऊपर शिंतिजल छिटल जाईत अछि।सब श्रद्धालु के प्रसाद रूपी दही-चूड़ा चीनी बाँटल जाईत अछि।साँझखन भगवतीक जलप्रवाह केल जाई छनि,किएक त बेटीक विदाई सेहो संध्याकाले के होईत अछि शुभ मानल गेल अछि।बेटीक विदाई साँझखन अहिलेल केल जाई छनि जे गन्तव्य पर पहुँचि बेसी काल समय नही रहैन आ रात्री विश्रामक समय जल्दी आविजाई जाहि सौं बेसी कष्टक अनुभव नहि होईन किएक त जागल में विछुरनक तकलीफ बेसी होई छैक सुतल में कम।प्रात भेने उठला के बाद नवस्फूर्ति सेहो अनुमव भेल आ ऐकदिन बितियो गेल रहै छैक ताहि सौं हृदय सेहो स्थिर भय जाईत छैक। ओहिना माँ जगजननी के सेहो ताहिलेल साँझखन भसौन होईछनि।ओना त ओ सबहक माँ स्वयं जगतजननी छथि किन्तु होई त छनि हुनको विदाई।

                   आई यात्रादिन सेहो छी मैया के विदाई छनि तें दही चूड़ा चीनीक भोग यात्रा में अहि भोग के शुभ मानल गेल अछि आ नीलकण्ठ महादेवक दर्शन अति शुभ फलदायी होईत छैक।

"जय नीलकण्ठ गोर लगैछी! 
जतरा दिनका भेट करै छी!"



वैदिक विधि सौं संपन्न मिथिलाक दुर्गा पूजा अतुलनीय अविस्मरणीय अछि।

जय मिथिला     जय मैथिल     जय मैथिली
साभार -: मिथिला पेज

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