दशमी छै पूजा शक्ति के आ शक्ति के प्रतिक छै सिन्दूर l
दशमी छै पूजा शक्ति के आ शक्ति के प्रतिक छै सिन्दूर l
भक्ति भाव सँ जे कोई करए नमन आ ध्यान
माँ दुर्गे ओकर सदा, करैत रहथि कल्याण...!
दशमी छै पूजा शक्ति के आ शक्ति के प्रतिक छै सिन्दूर l तैँ बँगाली विवाहित महिला लोकनि नवरात्रिके अन्तिम दिन माँ दुर्गा के आराधनाक बाद एक दोसराके सिन्दूर लगबैत छैथ l अहि साँस्कृतिक परम्पराके सिन्दूर खेला कहल जाईत छै l ई मानल जाईत छै कि माँ दुर्गा अपन नैहर सं विदा भs कs सासुर जाईत छैथ तैँ हुनकर माँग भरल जाईत छै l माँ दुर्गा के पान आ मिठाई सेहो चढ़ाएल जाईछै l
सिन्दूर खेलाके परंपरा देख कs अपन सबहक होली के याद आबि जाईछै l
पर्व, त्यौहार मात्र धार्मिक कर्मकाण्ड नै छै, ओकरा पाछाँ सामाजिक, साँस्कृतिक मान्यता सेहो रहैत छै l अपन भाषा, रहन सहन, सँस्कृतिसं लगाव भेनाई पिछड़ापन के निशानी नै छै l आधुनिकताक मतलब ई बिल्कुल नै छै कि अपन सँस्कृतिके बिसैर जाई l हरेक समुदायके अपन अपन समाज में प्रचलित साँस्कृतिक परंपराके जीवन्त रखबाक हर सँभव पर्यत्न करबाके चाही l
✍अज्ञात
भक्ति भाव सँ जे कोई करए नमन आ ध्यान
माँ दुर्गे ओकर सदा, करैत रहथि कल्याण...!
दशमी छै पूजा शक्ति के आ शक्ति के प्रतिक छै सिन्दूर l तैँ बँगाली विवाहित महिला लोकनि नवरात्रिके अन्तिम दिन माँ दुर्गा के आराधनाक बाद एक दोसराके सिन्दूर लगबैत छैथ l अहि साँस्कृतिक परम्पराके सिन्दूर खेला कहल जाईत छै l ई मानल जाईत छै कि माँ दुर्गा अपन नैहर सं विदा भs कs सासुर जाईत छैथ तैँ हुनकर माँग भरल जाईत छै l माँ दुर्गा के पान आ मिठाई सेहो चढ़ाएल जाईछै l
सिन्दूर खेलाके परंपरा देख कs अपन सबहक होली के याद आबि जाईछै l
पर्व, त्यौहार मात्र धार्मिक कर्मकाण्ड नै छै, ओकरा पाछाँ सामाजिक, साँस्कृतिक मान्यता सेहो रहैत छै l अपन भाषा, रहन सहन, सँस्कृतिसं लगाव भेनाई पिछड़ापन के निशानी नै छै l आधुनिकताक मतलब ई बिल्कुल नै छै कि अपन सँस्कृतिके बिसैर जाई l हरेक समुदायके अपन अपन समाज में प्रचलित साँस्कृतिक परंपराके जीवन्त रखबाक हर सँभव पर्यत्न करबाके चाही l
✍अज्ञात


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