हमरा एकर गुमान या (मैथीलि गीत)
मैथिली गीत
शीर्षक:- हमरा एकर गुमान या ( मैथिली अप्रकाशित काव्य संग्रह माॅ ऽ गई सॅ)
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या
इ वैदैही विद्यापति के धरती
इ हमर अभिमान या ..
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या............
मधुर वाणी स्नेह केर जानी
सब के अपन बुझी नही कोई आन या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या......
तीज त्योहार सॅ भरल पुरल
संस्कार सॅ सजल धजल
इ मिथिला के पहचान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या
सब जन के मुॅह पर मुसकी रहै छैन्ह
मुॅह मे पानक चुस्की रहै छैन्ह
नदी पोखरी सब डेगे डेगे
मन पुलकित फोका मखान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या.....
सादा जिनगी ऊॅच विचार
धोती कुर्ता पागक संस्कार
पाहुॅन पौरक के सब भगवान बुझै छी
सब धीया सीता समान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या......
कन्हा मे जेनऊ पैर मे खराऊ
कपार पर चंदन मुॅह मे वेदक वंदन
हर मैथिल विधा के खान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या....
कनिया पुत्री सब घोघ मे रहै छैथ
धीरे धीरे मुसकैत बात करै छैथ
अर्पण पुरहर सेहो करै छैथ
मन मे विदुषी भारती बनै के अरमान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या......
निपल पोतल घर दुआईर
बियाह मे बरयाती के गाइर
चित्रकारी सॅ सजल कोबर घर
हर्षित करे विधि विधान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या.....
मडुआ रोटी मारा माछ
दाइल भात पर तरूआ दही छाछ
चुड़ा चिन्नी सुंदर सुपाच्य खानपान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या.....
मंदिर मे पाथेर पुजी बरसाइत मे गाछ बिरिछ
गो पुजा मे गाऽ पुजी सब जीव मे बुझी अपन प्राण या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या........
इ वैदैही विधापति केर धरती
इ हमर अभिमान या
हम मैथिल मिथिला मे जनमल
हमरा एकर गुमान या ........
साभार - अमित (सुन्दर पुर)
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पोस्ट:- अशोक कुमार सहनी
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