दक दहेेज खरिद रहलछै दुल्हा
दक दहेेज खरिद रहलछै दुल्हा
बिकरहल्छै पायन कही हावानै बिकजाय,
बिकगेल्छै धरती कही अासमाननै बिकजाय ।
चाँन्दाेपर बिकरहलछै जमिन डरछैकी,
कही सुरजके तापाेनै बिकजाय ।
हरजगह बिकरहलछै स्वार्थक नीति,
डरछैकी धर्माेनै बिकजाय।
दक दहेेज खरिद रहलछै दुल्हा,
कही अाेकरे हाथ दुल्हननै बिकजाय ।
हरकामके घुस लरहलछै नेता,
कहि एकरेहाथे देशनै बिकजाय ।
खुलेअाम बिकरहलछै साँसद,
डरछैकही सँसद भवननै बिकजाय ।
अादमी मरलाके बादाे अाँयख खुलल रहैछै,
मुदा डरछैकही कफननै बिकजाय ।
✍श्री Gurudev Kamat Classic Singer
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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बिकरहल्छै पायन कही हावानै बिकजाय,
बिकगेल्छै धरती कही अासमाननै बिकजाय ।
चाँन्दाेपर बिकरहलछै जमिन डरछैकी,
कही सुरजके तापाेनै बिकजाय ।
हरजगह बिकरहलछै स्वार्थक नीति,
डरछैकी धर्माेनै बिकजाय।
दक दहेेज खरिद रहलछै दुल्हा,
कही अाेकरे हाथ दुल्हननै बिकजाय ।
हरकामके घुस लरहलछै नेता,
कहि एकरेहाथे देशनै बिकजाय ।
खुलेअाम बिकरहलछै साँसद,
डरछैकही सँसद भवननै बिकजाय ।
अादमी मरलाके बादाे अाँयख खुलल रहैछै,
मुदा डरछैकही कफननै बिकजाय ।
✍श्री Gurudev Kamat Classic Singer
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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