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"जहि हावामें, बहे पुरवैया"

"जहि हावामें, बहे पुरवैया"


✍अर्जुन प्रसाद गुप्ता"दर्दिला"
जहि हावामे,बहै पुर्बैया,अाेहि हावामे,हमर मन झुमैय,
भुलल बिछडल,यादमे,अहाँक दिलक,सन्देश कहैय ।
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अाे वसन्ती,सिहकैत रहैय,हरीहर,खुला मैदानमे,
मन सेहाे,हरीहर रहैय,प्रीत,बजैय जुवानमे,
अाेहि अंगना,फूल फुलैय,जे अंगना,मिथिला कहबैय ।
भुलल बिछडल ---------------------

माँ जानकीके,खेलल अंगना,शान्तिक,झण्डा फहरैय,
बागमति अा,काेशी नीचमे,कमला अा,बलान बहैय,
मनक सब,दुष्भाव बहाबै,अहिलेल मिथिला,पवित्र रहैय ।
भुलल विछडल -------------------

जय जय मिथिला,जय जय मैथिली,हाथ उठाकऽ, मिथिला मागब,
अागा बढू हम,मिथिलाबासी,कदम बढाकऽ,मिथिला नापब,
वैरी अइजऽ,दुष्दृष्टी लगौलक,बचाबू मिथिला,माई कहैय ।
भुलल विछडल -------------------

जहि हावामे,बहै पुर्बैया,अाेहि हावामे,हमर मन झुमैय,
भुलल विछडल,यादमे,अहाँक दिलक सन्देश कहैय ।

✍अर्जुन प्रसाद गुप्ता "दर्दिला"

     

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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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