स्वर्ग से नीक इ मिथिला नगरी
💠गीत 💠
✍👤सुरेन्द्र सूर्या
स्वर्ग से नीक इ मिथिला नगरी चर्चा अछि सरेआम।।
एक एहन इ धाम रे भैया दोसर नै कोनो ठाम।।
राम के स्वेम्बर अहिठीम भेला सीता मैया संग-२
धर्ती और आकाश में गूँजे मिथिला के प्रसंग
जोगी फकीर के अतै मिले जीवन के एक रंग
साधु सन्त तपस्बी से-२ मिथिला के उजागर नाम
एक एहन इ धाम................................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला.......................।।
तलाउ पोखैर में हरियर कंचन पानी के हिलकोर-२
गाछ बृक्ष और टाटी पर मिथिलानी के तिलकोर
पान मखान से सुन्दरता पोखैर के चारू
ओर
मिथिला के अनमोल रत्न-२ मिथिलानी के निशान
एक एहन इ धाम...............................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला......................।।
पैरकानमा विवाह पञ्चमी इ ऐतिहासिक मेला-२
अल्हा ऊदल कुमर बृजवानक नाच बरी निराला
पावन के खुशियाली में लोक अतै खूब झुमेला
अखनो कौवा मैना जगबे-२ सब के साँझ बिहान
एक एहन इ धाम..............................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला.....................।।
हाथ में हाथ मिला के चलै के मिथिले में अछि गुण-२
कला और कौसल में सबटा लोक अत निपुण एक दोसर के प्यार मिलै त दुःख बनै सुकून
बाट बटोही पाहुँन के -२ मानै यैठीम भगवान
एक एहन इ धाम................................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला.......................।।
✍👤 सुरेन्द्र सूर्या
नौसय बीघा-५
धनुषा(जनक)
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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✍👤सुरेन्द्र सूर्या
स्वर्ग से नीक इ मिथिला नगरी चर्चा अछि सरेआम।।
एक एहन इ धाम रे भैया दोसर नै कोनो ठाम।।
राम के स्वेम्बर अहिठीम भेला सीता मैया संग-२
धर्ती और आकाश में गूँजे मिथिला के प्रसंग
जोगी फकीर के अतै मिले जीवन के एक रंग
साधु सन्त तपस्बी से-२ मिथिला के उजागर नाम
एक एहन इ धाम................................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला.......................।।
तलाउ पोखैर में हरियर कंचन पानी के हिलकोर-२
गाछ बृक्ष और टाटी पर मिथिलानी के तिलकोर
पान मखान से सुन्दरता पोखैर के चारू
ओर
मिथिला के अनमोल रत्न-२ मिथिलानी के निशान
एक एहन इ धाम...............................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला......................।।
पैरकानमा विवाह पञ्चमी इ ऐतिहासिक मेला-२
अल्हा ऊदल कुमर बृजवानक नाच बरी निराला
पावन के खुशियाली में लोक अतै खूब झुमेला
अखनो कौवा मैना जगबे-२ सब के साँझ बिहान
एक एहन इ धाम..............................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला.....................।।
हाथ में हाथ मिला के चलै के मिथिले में अछि गुण-२
कला और कौसल में सबटा लोक अत निपुण एक दोसर के प्यार मिलै त दुःख बनै सुकून
बाट बटोही पाहुँन के -२ मानै यैठीम भगवान
एक एहन इ धाम................................।।
स्वर्ग से नीक इ मिथिला.......................।।
✍👤 सुरेन्द्र सूर्या
नौसय बीघा-५
धनुषा(जनक)
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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