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नव गीत के नव राग के जिनगीक नव आश के

नव गीत के नव राग के जिनगीक नव आश के

..✍👤अमित पाठक 

नव भोर ई नव दिन ई नव बरख ई उल्लास के
नव गीत के नव राग के जिनगीक नव आश के
नव गीत के................

अनुराग प्रति स्वयंगहु संगहि
                     अदनहुँ लए हियत: राखिक'
नहिं चोट किनकहु देब किन्नहु
                              बोल केहनहुँ बाजिक'
नित मोन के सब कोन में दए वास मधु सन भाष के
नव गीत के.................

अधलाह् पछिला साल केर
                        बिसरब ने संगति फेर हो
सद्कर्म केर सन्गोर हो
                         आ हर्ष नित बेरि-बेर हो
सब हारि के पुनि जीत में परिमार्जनक विश्वास के
नव गीत के...................

ऊर्जा नवल दिनकर किरण सँ
                           प्रज्वलित कए मोन के
कालहु के अपनहिं वश करब
                        भेदब गगन चहुँ कोण के
कर्मक प्रतापहिं करब सींचित निज भविष्यहु चास के
नव गीत के..................
नव भोर ई....................


                                    ..✍👤अमित पाठक


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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