अहिं हमर जान छी
अहिं हमर जान छी
✍👤अहमद रेज़ा
अहिं हमर जान छी ,अहिं हमर प्राण......
अहिं हिर्दयक मान छी ,अहिं हमर अरमान ........
सूती त सपना अहीँक देखि ,उठी त पाबि प्यार.......
जिनगी भैर दिहा गोसैयाँ,भरल पुरल संसार ,,,,
आहाँ छी हमर हिर्दयक रानी ,,आहाँ छी सीता समान.......
अहिं हमर जान छी,अहिं हमर प्राण ......
अहिं हिर्दयक मान छी ,अहिं हमर अरमान ........
होइ छी जखन दूर हमरा सँ ,नयन में भरी जाइ नीर......
नै होउ कहियो दूर हमरा सँ ,नै रहे मन अस्थिर.......
पीर पिरितिया के लागल ,अहिं छी रामक बाण ......
अहिं हमरा जान छी,,अहिं हमर प्राण .....
अहिं हिर्दयक मान छी,अहिं हमर अरमान .........
✍👤अहमद रेज़ा
हाँसपट्टी,8
हाल दोहा क़तार
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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