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हे आदि शक्ति हे जगदम्बा

हे आदि शक्ति हे जगदम्बा

✍👤मैथिल प्रशान्त 


हे आदि शक्ति हे जगदम्बा
निर्मल हिय उत्कृष्ट करु ।
मनुख मनुखसँ प्रेम करय
मनुख एहन मा सृष्टि करू ।।

दनुज मनुजमे बढि रहलै 
मा एकबेर फेर हुंकार भरु ।
ममतामयी करुणामयी छी 
सद्भाव भरु दुलार भरु ।। 

देशमे क्लेश बढले जाइ छै 
बाज' देलियै वाचाल भेलै । 
हमहीं हम छी अछि दोसर के 
हमरे हम मा काल भेलै ।। 

कोखिये धीकेँ मारिक' मा 
मंदिर जा चंडी पाठ करय । 
बेटीकेँ की क्यो मोल बुझय 
सोना देलही जग काठ करय ।।

कतौ भूखसँ छटपट प्राण करै 
कतौ हिंसा छै क्यो लूटि रहल ।
खंड खंड तोहर नैहर मिथिला 
खंडमे मैथिली टूटि रहल ।।

कहियो रौदी कहियो दाहड़ 
छै हाहाकार चहुँओर उठल ।
संकट छौ तोरे रचना पर मा 
कारी कारी मेघ घनघोर उठल ।।

जँ तोहर कृपा हे जगजननी, 
उतुंग शीखर हम चढि जेबै ।
भावक गंगा बस पावन कर 
सुन्नर कविता हम गढि जेबै ।।

✍👤 मैथिल प्रशान्त 
  दुर्गौली, बेनीपट्टी ।।


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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