विकाश झा 'क पांच कविता
विकाश झा 'क पांच कविता
विकाश झा मैथिलीक युवा कवि छथि. एखन धरि हिनक किछुए कविता प्रकाशित भेलनिए. आइ अपन मिथिला पर एकटा पैघ अंतरालक बाद हिनक पांच टा कविता देल जा रहल अछि. एहि कविता सभक संबंध मे एतबे कहब कि विकाशक कविताक अपन ग्रामर, अपन सिंटेक्स छनि. एतबे नहि हिनक डिक्शनरी सेहो अदभुत छनि. खास कें भाव आ शब्दक संग विकाशक ट्रीटमेन्ट गजब कें छनि. सभटा कविता हिनक आइडेंटिटी बनि क' सोझां आबि रहल अछि. सभ सं आशाजनक गप्प ई अछि, कि एहि कविता सभ मे समयक पहिचान अभरि रहल अछि. अलग-अलग मूडक कविता रहलाक बादो सभटा कविता अपन टटकापन आ डीप इमोशनक अंडरकरेंटक संग पाठकवर्ग कें बेस प्रभावित करैत अछि आ बेर-बेर पढ़ल जयबाक मांग करैत अछि. हमरा सभ कें एहि युवा कवि पर नजरि
रखबाक चाही.
(१). हम बट्टे तूँ
आब नहि सहेजबौ हम
मोनक जबकल भरास
जे कोना झिकलहिन अझक्के
जिनगीक सोँगर
झखा देलहिन सबटा मनोरथ
अखना क' देलहिन्
भग्न करेजक उद्दाम लिलसा
आ
विरोध मे लिखि देलहिन
मानवाधिकारक नामे रिपोर्ट ढ़ढ़र
मोनक जबकल भरास
जे कोना झिकलहिन अझक्के
जिनगीक सोँगर
झखा देलहिन सबटा मनोरथ
अखना क' देलहिन्
भग्न करेजक उद्दाम लिलसा
आ
विरोध मे लिखि देलहिन
मानवाधिकारक नामे रिपोर्ट ढ़ढ़र
आब नहि रहब आच्छन्न हम
करजन्नी आँखि लेल,अपन पोनघैत हुलासक नरैंटी दबा
उठाएब एकटा निस्सन डेग,
करजन्नी आँखि लेल,अपन पोनघैत हुलासक नरैंटी दबा
उठाएब एकटा निस्सन डेग,
तूँ कहि देलहिन खरियैर क',नहि पजरतौ धधरा तोरा मे
हमर मेहियाएल आँच सँ,आ तकर अहिंसात्मक विरोध मे
घुरा देलहीन तूँ हमर अरजल नेह
अकादमीक अवार्ड सन,बिन थ्रिनट्टा चलौनहि
अधमेरुत केलैं उमकैत जुआनी,
हमर मेहियाएल आँच सँ,आ तकर अहिंसात्मक विरोध मे
घुरा देलहीन तूँ हमर अरजल नेह
अकादमीक अवार्ड सन,बिन थ्रिनट्टा चलौनहि
अधमेरुत केलैं उमकैत जुआनी,
आब नहि चलतौ मनमौजी
हमर गेरुआ,ओढ़ना,बिछौना-कविता,कागत, कलम
सब दुत्कारै छौ तोरा
ई सद्यः असहिष्णुता छौ
नाइट ऑउटक बहन्ने-गुहायल रहलैं जुट्टी सन
आ
पराते मँगैछें 'डिस्टेंस'
हमर गेरुआ,ओढ़ना,बिछौना-कविता,कागत, कलम
सब दुत्कारै छौ तोरा
ई सद्यः असहिष्णुता छौ
नाइट ऑउटक बहन्ने-गुहायल रहलैं जुट्टी सन
आ
पराते मँगैछें 'डिस्टेंस'
ई बैजनाथ धामक धर्मशाला नहि छै
जे आबाजाही मनमाना होय
ई हमर प्रेम छै बंगलिया पान सन
चूसि आ चीबा जँ पिकियाओ देबहिन
तैयो तोहर
जीह,ठोर,दाँत,कल्ला,फेफ़रा,लिवर
आ भितरका सबटा भ जेतौक लाल
जे आबाजाही मनमाना होय
ई हमर प्रेम छै बंगलिया पान सन
चूसि आ चीबा जँ पिकियाओ देबहिन
तैयो तोहर
जीह,ठोर,दाँत,कल्ला,फेफ़रा,लिवर
आ भितरका सबटा भ जेतौक लाल
ई लाली पसीन छै देवी केँ
जाय छियौ कालीथान
हुलासक बलिप्रदान क'र
जाहि नुनछराइन स्वाद सँ
पसीझ उठथिन कालीमाय
आ ब्रह्मांडक अदालत मे
अकासक श्वेत पत्र पर
लिखथिन निस्तुकी जूलियटक पता
जे हमरा चटा क' माहुर
परा जेतै फेरो तोरे सन...
जाय छियौ कालीथान
हुलासक बलिप्रदान क'र
जाहि नुनछराइन स्वाद सँ
पसीझ उठथिन कालीमाय
आ ब्रह्मांडक अदालत मे
अकासक श्वेत पत्र पर
लिखथिन निस्तुकी जूलियटक पता
जे हमरा चटा क' माहुर
परा जेतै फेरो तोरे सन...
(२) प्रेम आ डिस्कॉउन्टक मौसम
जनवरी सँ मार्च धरि.... अगस्त सँ अक्टूबर धरि... किछु मास छै अनारकल
जाहि मे हमार अहाँक प्रेम
भ' उठैत अछि
कनेक बेसी सेहन्तगर
जाहि मे हमार अहाँक प्रेम
भ' उठैत अछि
कनेक बेसी सेहन्तगर
अलना पर झुलैत अछि
अहाँक कोशिलिया
हमर एकटा ब्रांडेड जीन्स
जे अहाँ बेसाहलौं अछि
जन्मदिनक मास भरि बाद
अहाँक पाँजर धेने ओ जे सुतल अछि धोधि बला टेडी
ओकर पेट मे भरल छैक
हमर गोल्डफ्लेकक धुँआ
हमर पोकिटखर्चाक कंजूसी कतेक मनलगु होएइ ने
भोर सँ साँझ धरि
नगरक चौहद्दी छानब
मोल-भाव करैत भगैत रहब
आ मुनहारि साँझ
ओलाक कूपने होस्टल पहुँचब
हाथ मुँह धोइतहि मँगायब
डिस्काउंटक डामिनोज पिज़्ज़ा
ऐरसेलक नाइट पैक सँ राति केँ करब भोर
ओह ! अहि बैमनमा मौसम मे
अहाँक इथिनिक परिधान देह केँ ऐंचेने झिकल
अहाँक पेराबोला सन सेल्फ़ी
आ आँखि मे मधुबाला सन
लेकमीक मसीह काजर बड्ड सोह परैत छी अनारकली !आउ ने एमरीदा फेर सँ
कोनो भूतियाएल मनमीत सन
हे ! किरिया खाय छी हम
भरि पोख अहाँ सँ करब प्रेम
एकटा हेहरु भेल माय सन
जेकरा बेसी सिनेहगर भ' जाइछ
कुम्भ मे हरायल फेर आपिस भेटल बेटा
अहाँक कोशिलिया
हमर एकटा ब्रांडेड जीन्स
जे अहाँ बेसाहलौं अछि
जन्मदिनक मास भरि बाद
अहाँक पाँजर धेने ओ जे सुतल अछि धोधि बला टेडी
ओकर पेट मे भरल छैक
हमर गोल्डफ्लेकक धुँआ
हमर पोकिटखर्चाक कंजूसी कतेक मनलगु होएइ ने
भोर सँ साँझ धरि
नगरक चौहद्दी छानब
मोल-भाव करैत भगैत रहब
आ मुनहारि साँझ
ओलाक कूपने होस्टल पहुँचब
हाथ मुँह धोइतहि मँगायब
डिस्काउंटक डामिनोज पिज़्ज़ा
ऐरसेलक नाइट पैक सँ राति केँ करब भोर
ओह ! अहि बैमनमा मौसम मे
अहाँक इथिनिक परिधान देह केँ ऐंचेने झिकल
अहाँक पेराबोला सन सेल्फ़ी
आ आँखि मे मधुबाला सन
लेकमीक मसीह काजर बड्ड सोह परैत छी अनारकली !आउ ने एमरीदा फेर सँ
कोनो भूतियाएल मनमीत सन
हे ! किरिया खाय छी हम
भरि पोख अहाँ सँ करब प्रेम
एकटा हेहरु भेल माय सन
जेकरा बेसी सिनेहगर भ' जाइछ
कुम्भ मे हरायल फेर आपिस भेटल बेटा
(३) स्पेस
नगरक असंख्य भीड़ मे
रहैछ एकटा दुनिया
'मॉल' मे पाया कातक दुनिया
'सिनेमा' मे अंतिम सीटक दुनिया
उद्यान मे झारक कातक दुनिया
आँजुर भरि नेहक लेल
झिझिरकोना खेलाइत दुनिया ।
जे चाहै छै कने बिलमओ 'ट्रैफिक'किंवा परैत रहौ अछार,आ
'ओवरब्रिजक' छत्ता मे ओ भीजैत-रहै एकदोसरक संग
ओ चाहै छै बन्न भ' जाऊ मेट्रो
नहु नहु ससरौ सिटी बस,आ
घंटा धरि बेसी थाम्हि सकै -ओ एकदोसरक हाथ ।
अपने मे हेरायल इ दुनिया
मँगैत छैक 'स्पेस'चहुदिश लपलपाइत आँखि सौं
जे घुरै छै ओकरा जैंह-जतर
जेना टेम्पूबला घूरै छै कतका ऐना सौं ।
इ दुनिया देखैत छैक अम्बेदकर के-चौबटिया पर ठाड़ पोथी धेने
फुटैत छै ओकरा मे भरोखक इजोत
न्यायालय केर गुम्बज ओकरा अभरैत छै
मनोकामनाक सिद्ध पीठ सन
ओ हमरा अहाँ सौं भगैत/बँचैत
सुस्ता अबैत छै सिन्धुक कछेर सौं ।
मुदा कतेक दिन खेपतै एना,कोना अनामति रहतै इ दुनिया ?तैं एकरा जीबैत रहबा लेल
पसार' दियौ पाँखि चुनमुन्नी के
उड़' दियौ निधोख प्रेमक अकास मे
आ हम खटाउंस नहि मनुख भ'देखि ओकरे आँखि सौं ओकर दुनिया
हरियर-एक रंग मोनक चास सन
लाल-एक रंग सबहक खून सन ।
रहैछ एकटा दुनिया
'मॉल' मे पाया कातक दुनिया
'सिनेमा' मे अंतिम सीटक दुनिया
उद्यान मे झारक कातक दुनिया
आँजुर भरि नेहक लेल
झिझिरकोना खेलाइत दुनिया ।
जे चाहै छै कने बिलमओ 'ट्रैफिक'किंवा परैत रहौ अछार,आ
'ओवरब्रिजक' छत्ता मे ओ भीजैत-रहै एकदोसरक संग
ओ चाहै छै बन्न भ' जाऊ मेट्रो
नहु नहु ससरौ सिटी बस,आ
घंटा धरि बेसी थाम्हि सकै -ओ एकदोसरक हाथ ।
अपने मे हेरायल इ दुनिया
मँगैत छैक 'स्पेस'चहुदिश लपलपाइत आँखि सौं
जे घुरै छै ओकरा जैंह-जतर
जेना टेम्पूबला घूरै छै कतका ऐना सौं ।
इ दुनिया देखैत छैक अम्बेदकर के-चौबटिया पर ठाड़ पोथी धेने
फुटैत छै ओकरा मे भरोखक इजोत
न्यायालय केर गुम्बज ओकरा अभरैत छै
मनोकामनाक सिद्ध पीठ सन
ओ हमरा अहाँ सौं भगैत/बँचैत
सुस्ता अबैत छै सिन्धुक कछेर सौं ।
मुदा कतेक दिन खेपतै एना,कोना अनामति रहतै इ दुनिया ?तैं एकरा जीबैत रहबा लेल
पसार' दियौ पाँखि चुनमुन्नी के
उड़' दियौ निधोख प्रेमक अकास मे
आ हम खटाउंस नहि मनुख भ'देखि ओकरे आँखि सौं ओकर दुनिया
हरियर-एक रंग मोनक चास सन
लाल-एक रंग सबहक खून सन ।
(४) एकटा अनुत्तरित प्रश्न
एकैसम शताब्दीक हाट पर
फ्लिपकार्ट सँ पनही किनैत मनुख
मनुख नहि -
एकटा यांत्रिक जीन थिक
जे मशीनक चाबुक सँ हंकाएत
अपसियाँत भगैत
जमीनक मंगल सुड्डाह क'
ठिकिया रहल अछि अकाशीय मंगल
मनुख नहि -
एकटा यांत्रिक जीन थिक
जे मशीनक चाबुक सँ हंकाएत
अपसियाँत भगैत
जमीनक मंगल सुड्डाह क'
ठिकिया रहल अछि अकाशीय मंगल
एकर धमनी मे बहैत शोणित मे
मिझराएल छै ऐसिड
एकर माथक कोशिका मे
मढ़ल छै सिलिकॉन
आ एकर अतड़ी मे गुहल छै
कॉपरक महीन तार
जे एकर चेतनाक अचिया फुकि
डाहि रहल छै हिरोशिमा-नागाशाकी
मिझराएल छै ऐसिड
एकर माथक कोशिका मे
मढ़ल छै सिलिकॉन
आ एकर अतड़ी मे गुहल छै
कॉपरक महीन तार
जे एकर चेतनाक अचिया फुकि
डाहि रहल छै हिरोशिमा-नागाशाकी
ई अपन निर्माणक ओरियान मे
पांगि रहल छै हरियरी
उपछि रहल छै पोखरि
भत्थन क' रहल छै इनार
आ बन्नुक तनने ओगरबाहि करैत
बतहा कुक्कुर सन
भूकि रहल छै अनहोनिक आगम
पांगि रहल छै हरियरी
उपछि रहल छै पोखरि
भत्थन क' रहल छै इनार
आ बन्नुक तनने ओगरबाहि करैत
बतहा कुक्कुर सन
भूकि रहल छै अनहोनिक आगम
ई भाववाची विशेषणक नरेटी दबा
लांक्षित करैत छै जातिए संज्ञा
आ विज्ञानक व्याकरण बिनबुझने
लिख रहल छै विकासक महाकाव्य
जाहि मे संवेदनाक उद्घोष नहि
निहित छै आफदक अलंकार
लांक्षित करैत छै जातिए संज्ञा
आ विज्ञानक व्याकरण बिनबुझने
लिख रहल छै विकासक महाकाव्य
जाहि मे संवेदनाक उद्घोष नहि
निहित छै आफदक अलंकार
एकर अपसोगारथी प्रवृति
संपदा के मटियामेट करबा पर बिर्त
विपदा केँ हहकारैत
मनुखक भविष्य पर ठाढ़ करैत छै
विगुम प्रश्नचिन्ह !
जकर उत्तर किंसाइत हेतैक वएह
से मुदा कहिया ?
एकटा अनुत्तरित प्रश्न...
संपदा के मटियामेट करबा पर बिर्त
विपदा केँ हहकारैत
मनुखक भविष्य पर ठाढ़ करैत छै
विगुम प्रश्नचिन्ह !
जकर उत्तर किंसाइत हेतैक वएह
से मुदा कहिया ?
एकटा अनुत्तरित प्रश्न...
(५). ई केहन गाम छै
सकुचैत देशान्तरक मध्य
उपजैत नव वैश्विक परिवेश मे
समुच्चा ग्लोब
सहटि क' भेल छै एकटा गाम
उपजैत नव वैश्विक परिवेश मे
समुच्चा ग्लोब
सहटि क' भेल छै एकटा गाम
गाम, जाहि मे एके संग
विकासक बटगबनी गबैत छै
मेसोपोटामिया आ मोहनजोदड़ो
गाम,जाहि मे
वाल स्ट्रीटक पीड़ा सँ
ठोहि पारि कनैत छै दलाल स्ट्रीट
विकासक बटगबनी गबैत छै
मेसोपोटामिया आ मोहनजोदड़ो
गाम,जाहि मे
वाल स्ट्रीटक पीड़ा सँ
ठोहि पारि कनैत छै दलाल स्ट्रीट
अहि गाम मे
साम्यवादक घेंट मोकने काबिज छै
मुठ्ठी भरि लोक
जे पनामा किंवा स्विस मे
नून चटा मारि रहल छै
गामक सेंसेक्स
साम्यवादक घेंट मोकने काबिज छै
मुठ्ठी भरि लोक
जे पनामा किंवा स्विस मे
नून चटा मारि रहल छै
गामक सेंसेक्स
अहि गामक वातानुकूलित छाहरि मे
मौला रहल छै
कुजरनिक ढाकी मे राखल
पटुआ आ परोड़
ई गाम अपन इसखीक हाहुति मे
उजारि रहल छै चार
आ ,चार परक तिलकोर
मौला रहल छै
कुजरनिक ढाकी मे राखल
पटुआ आ परोड़
ई गाम अपन इसखीक हाहुति मे
उजारि रहल छै चार
आ ,चार परक तिलकोर
अहि गामक अट्टालिकाक नौ' मे
समाधिस्थ छै सहस्रो एकचारी
जकर लेखा-जोखा
नहि भेटैत छी कोनो आर्काइव मे
समाधिस्थ छै सहस्रो एकचारी
जकर लेखा-जोखा
नहि भेटैत छी कोनो आर्काइव मे
ई गाम अपन उद्योगक आँच मे
सुड्डाह केलकै
कतेको सिक्की मौनी
घोंटैत गेलै नहु नहु
कतेको घरक कमौनी
आ विकासक लौडिस्पिकर फूंकि
पचा गेलै
पसीखाना सँ अबैत विपत्तिक गीत
सुड्डाह केलकै
कतेको सिक्की मौनी
घोंटैत गेलै नहु नहु
कतेको घरक कमौनी
आ विकासक लौडिस्पिकर फूंकि
पचा गेलै
पसीखाना सँ अबैत विपत्तिक गीत
अहि गामक लोक आब नहि
ढेरियबै छै गोबर-करसी
कहाँ देखैत छियै मोरंग बाली केँ
सुकरातीक लेल बनबैत दियौरी
बनेबो कियेक करतै ?
ओकरा कोनो बुझल नहि छै
जे रूस पठौतै यूरिया
आ कुरियर करतै चीन
लच्छाक लच्छा भुकभुक़िआ
ढेरियबै छै गोबर-करसी
कहाँ देखैत छियै मोरंग बाली केँ
सुकरातीक लेल बनबैत दियौरी
बनेबो कियेक करतै ?
ओकरा कोनो बुझल नहि छै
जे रूस पठौतै यूरिया
आ कुरियर करतै चीन
लच्छाक लच्छा भुकभुक़िआ
ई जे गाम छै
से उपभोगक एक विराट मंच
आ रचैत छै स्वांग
मनुख केँ सुखितगर बनेबाक
मुदा बिसरल छै
जनकल्याणक साबिक मंत्र
सर्वे भवन्तु सुखिनः ...
से उपभोगक एक विराट मंच
आ रचैत छै स्वांग
मनुख केँ सुखितगर बनेबाक
मुदा बिसरल छै
जनकल्याणक साबिक मंत्र
सर्वे भवन्तु सुखिनः ...
✍👤विकाश झा
साभार :-ई मिथिला डॉट कॉम सँ
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
विकाश झा 'क पांच कविता
Reviewed by Domain Registration Nepal
on
दिसंबर 24, 2016
Rating: 5
Reviewed by Domain Registration Nepal
on
दिसंबर 24, 2016
Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं