आय लगइत अछि मिथिला मिथिले सन
आय लगइत अछि मिथिला मिथिले सन
✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
आय लगइत अछि मिथिला मिथिले सन !
नवका चूरा गम - गम करैत अछि सबठन !!
भोरहि बड़का कक्का मूठ कतरलनि धन !
आय बुझना जाइत आयल अछि अगहन !!
खापरि मुका धान लारनि पर मारहि झन !
टेकुरा - समाठ चलए ऊखड़ि मेऽ एखन !!
धूआं-धुकूर भेल अछि चिनवारे पर अगिन !
चूरा-दही गूर मूर सब छथि खयवा मे मगन !!
हर्खित मोने काज मे लागल छथि सब जन !
कहथि 'चन्द्र' एहने मिथिला रहैत सदिखन !!
✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
👤✔✔✔✔✔
👃👃👃👃
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✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
आय लगइत अछि मिथिला मिथिले सन !
नवका चूरा गम - गम करैत अछि सबठन !!
भोरहि बड़का कक्का मूठ कतरलनि धन !
आय बुझना जाइत आयल अछि अगहन !!
खापरि मुका धान लारनि पर मारहि झन !
टेकुरा - समाठ चलए ऊखड़ि मेऽ एखन !!
धूआं-धुकूर भेल अछि चिनवारे पर अगिन !
चूरा-दही गूर मूर सब छथि खयवा मे मगन !!
हर्खित मोने काज मे लागल छथि सब जन !
कहथि 'चन्द्र' एहने मिथिला रहैत सदिखन !!
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| लेखकः✍ वी०सी०झा"बमबम" |
✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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