बीहनि कथा 🐚 साउख संऽ
💐 बीहनि कथा
🐚 साउख संऽ
✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
फूदन आ बूचाय लंगोटिए संगी छल , आर किछु संग हउ वा नहि मुदा इस्कुल दुनू गोटे संगहि जाइत छल ! फूदन ठोस गिरहस्तक बेटा छल तऽ बूचाय गामक कने देखावटी सूभ्यस्त रजिस घरक छल एतबहि दुहू मे अंतर छलहि ! खैर जे किछु समय'क संग आब ओ सब गामक इस्कुल संऽ निकलि बड़का इस्कुल ( हाई स्कुल ) जाय लागल छल ! आ जखने बड़का इस्कुल जाय जोगर ( छेटगर ) भऽ गेल तऽ नीक बेजाय सेहो बुझवा मे भांगठ नहि रहि गेल छलहि ! ऊँच - नीच , छोट - पैघ , छूआ - छूत , जाति - पाति आदि सबके नीक बोध सेहो भऽ गेल रहय !
एक दिन एहिना फूदन खाइते छल कि बूचाय इस्कुल जयवा'क खातिर एकरा संग करवा लेल आबि गेलहि :-
~ ऐंऽ रउ फूदन तों सब दिन मडूए'क रोटी किआ खाइत छहि ?
~ हँ रउ दोष ! इ हमरा खेत मऽ उपजय छय तऽ कि करबय ?
~ खेत मे बासमती सेहो उपजय छउ ने ? ओकरा तऽ तोहर बाबू बेच दैइत छउ ! कि ने ?
~ ओना तोंऽ सब कि खाइत छहि मिता ?
~ हम सब तऽ ओहय :-
बासमती केर चाउर, न छ अल्लू कोबी माछक झोर !
राहड़ि'क दालि ताहि, पर संऽ तरल रहैत छै तिलकोर !!
# प्रात भेने फूदन कने सकाले इस्कुल बिदा भेल इ देखवा लेल जे आखिरकार ठीके बूचाय'क भोजन एतेक उच्च रहैत छैइक !
~ कि मिता अहुँ तऽ मडूए रोटी खा रहल छी आय ?
~ नय मिता ! हम तऽ अहाँ'क खाइत देखलहु तऽ साउक संऽ माय के कहि बनबौंलहु !
~ बुझलहु मिता सबटा बात बुझलहु ! अहुं गप्पीए भऽ गेलहु !
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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🐚 साउख संऽ
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| मरुवा के रोटी |
फूदन आ बूचाय लंगोटिए संगी छल , आर किछु संग हउ वा नहि मुदा इस्कुल दुनू गोटे संगहि जाइत छल ! फूदन ठोस गिरहस्तक बेटा छल तऽ बूचाय गामक कने देखावटी सूभ्यस्त रजिस घरक छल एतबहि दुहू मे अंतर छलहि ! खैर जे किछु समय'क संग आब ओ सब गामक इस्कुल संऽ निकलि बड़का इस्कुल ( हाई स्कुल ) जाय लागल छल ! आ जखने बड़का इस्कुल जाय जोगर ( छेटगर ) भऽ गेल तऽ नीक बेजाय सेहो बुझवा मे भांगठ नहि रहि गेल छलहि ! ऊँच - नीच , छोट - पैघ , छूआ - छूत , जाति - पाति आदि सबके नीक बोध सेहो भऽ गेल रहय !
एक दिन एहिना फूदन खाइते छल कि बूचाय इस्कुल जयवा'क खातिर एकरा संग करवा लेल आबि गेलहि :-
~ ऐंऽ रउ फूदन तों सब दिन मडूए'क रोटी किआ खाइत छहि ?
~ हँ रउ दोष ! इ हमरा खेत मऽ उपजय छय तऽ कि करबय ?
~ खेत मे बासमती सेहो उपजय छउ ने ? ओकरा तऽ तोहर बाबू बेच दैइत छउ ! कि ने ?
~ ओना तोंऽ सब कि खाइत छहि मिता ?
~ हम सब तऽ ओहय :-
बासमती केर चाउर, न छ अल्लू कोबी माछक झोर !
राहड़ि'क दालि ताहि, पर संऽ तरल रहैत छै तिलकोर !!
# प्रात भेने फूदन कने सकाले इस्कुल बिदा भेल इ देखवा लेल जे आखिरकार ठीके बूचाय'क भोजन एतेक उच्च रहैत छैइक !
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| मरुवा |
~ कि मिता अहुँ तऽ मडूए रोटी खा रहल छी आय ?
~ नय मिता ! हम तऽ अहाँ'क खाइत देखलहु तऽ साउक संऽ माय के कहि बनबौंलहु !
~ बुझलहु मिता सबटा बात बुझलहु ! अहुं गप्पीए भऽ गेलहु !
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| लेखकः✍vidya chandra jha जी |
✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
काथिनियाँ🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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