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परिछन गीत

परिछन गीत
✍👤राजेश मोहन झा
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चोरा लेलन्हि, किछु चोरा लेलन्हि
हमर हिया कें चोरा लेलन्हि,
सुनु हे सखिया! श्यामल दूल्हा
हमर हिया कें चोरा लेलन्हि।

ठक बक ककरा छै पाहुन
पूछिते भ' गेल भोर हे
बिनु जानल नहि छोड़ब दूल्हा
नाक धरब बड़ जोर हे,
बैसल छथि सुधबौक बनल ओ
मैथिलानी लग मति हेरा गेलन्हि।

चोरा लेलन्हि........॥

सौंसे मिथिला पूछि रहल अछि
नगर गाम भेल शोर हे
अपने सुन्नर श्याम रंग छी
आरो छथि कोना गोर हे,
धनुखा तोड़य शीश उठल छल
आब लाजे नैना झुका लेलन्हि।

चोरा लेलन्हि.......॥

एहन मनोहर रूप ने देखल
पानक लाली ठोर हे
पाग भाल पर चमकि रहल जेना
सूरूजक लाली भोर हे,
बसात विदेहक लगिते देखू
श्याम रंग आब गोरा गेलन्हि।

चोरा लेलन्हि......॥
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     ✍👤:------  राजेश मोहन झा "गुंजन"।
(हे मर्यादा पुरुषोत्तम! आजु मिथिलाक लेल अद्भुद क्षण अछि। अपने पाहुन बनि क' हमर मिथिला मे अयलहुं, मैथिल हेबाक कारणे अपने संग हास परिहास करबाक हमरा अधिकार अछि। ई अनमोल अधिकार हम नहि छोड़ब।)


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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