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विरहानल हेमन्त ( ऋतु गीत )

विरहानल हेमन्त ( ऋतु गीत )

✍👤शिव कुमार झा "टिल्लू"
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रहब कोना एकसरि सियाला मे
अहींसंग चाह पीयब पियाला मे !
ताकै हेमन्तबाट परदेश ने बसियौ
धान गेल पाकि झाड़ि ढ़ेकीमे कसियौ
कमल ठोर बन्न सरित नाला मे !
चन्दनके उपटनसँ कांति सजेबै
गेना' के फूल लोढ़ि जूड़ा बनेबै
चलू'ने प्रेमक मधुशाला मे !
दक्षिणायन सुरूज अहाँ किए मोरङ्गमे
जयपुरक रजाइ किनब अबियौने संगमे
आकि मोन रमल हिमबाला मे !
शीतल पवन किए गेलहुँ हिमालय
आबि जाउ गाम बनत एत्तहि प्रेमालय
चलबै हेमन्तक रंगशाला मे !
ह'म सिद्धिफूल बनब अहींकेँ प्रियतम
एकसरिमे विरहानल क' रहलै सरगम
गुनिधुनि गाँथब  नेहमाला मे !

गीतकार ✍👤शिव कुमार झा "टिल्लू"


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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