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बेटी के पुकार

। बेटी के पुकार  ।।


✍धनेश्वर ठाकुर 

बेटीके सब बोझ बुझैछै
केहन समाजक रीत छै

बेटी नै त बेटा कत सँ औतै ?
किए नै धियानमे राखैछै ?

बेटी के कखनो नै बोझ समझियौ 
बेटीओ सब नीक नीक काज करै छै 

नैहर सँ ल' क सासुर तक 
बेटीए सबटा  भार बोकैछै

छोट मे बेटी-माए बाबूके 
बेसीध्यानमे रखैछै

नम्हर भ'क सासुर जा'क
साउस ससुरके मान करैछै

तखन कहू जे बेटी कोना
बोझ समाजक होइछै माए ?
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✍   धनेश्वर ठाकुर 
धनुषा धाम 4 लक्ष्मीपुर 
हाल मरूभुमी देश 
दोहा कतार।  

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पोस्ट:- अशोक कुमार सहनी
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