सम्बलताक दीप
|| सम्बलताक दीप ||
उद्दोगक आँगन मे
किंवा निर्माणाधीन मेट्रोक माथी पर
स्त्री लोकनिक हेंज
लेसि रहल अछि
सम्बलताक दीप
सहेँ-सहेँ सहे फाटए लागल अछि अन्हार
फरीछ होबए लागल अछि-
एक गोट नवका भोर ।
कुमकुम-मेहदी सजाओल हाथ मे
जेट विमानक कंट्रोल
आ बित्ता भरि घोघक ओजी पर
पियरका हेलमेट
बाँचि रहल अछि
एहि युगक नूतन परिचय।
जखन देखैत छी हिनका सभ केँ
साड़िक फाँर बन्हने
सहकर्मीक संग खैनी चुनबैत
बेरहटिया खेलाक बाद
ओही हेंज मे निसभेर सुतल
कि गाँती मे चिल्हका केँ बन्हने
पजेबा ढ़ोइत
तखन एहि मसक्कैत सँ
उपजैत देखैत छी प्रगतिशील चेतना ।
कोहबर सँ कानून धरि उपेक्षित
ई अधटुकड़ी समाज
औखन याचनाक प्रवित्ति सँ बहरा
भारी उद्दोग सँ
सॉफ्ट स्किल धरि
नव्यतम सुचना-प्रौधौगिकी सँ
प्राच्य अर्गला कील धरि
अपन सशक्त उपस्थिति सँ
एहि शताब्दीक मुहथरि पर
लिखी रहल अछि विवक्षाक अरिपन।
जखन हिनका लोकनिक प्रतिभा
प्रकृति वक्ष सँ
बेसी उत्तंग करैत अछि समुच्चा देशक वक्ष
तखन की खेलक मेदान सँ
कोहबरक ओछाओन धरि
वक्ष अवलोकित कएनिहार सभ
लेताह पतनुकान ?
आ सौराठक अदँकेँ
सोइरि सँ पहिनहि बिदागरी कए
कतेको मैडल निछौनिहार सभ केँ
बेधने हेतैन ग्लानिक बाण ?
ओना शीलाक जुआनी पर
तकथइयाँ करैत देश
जखन अबड़ेरैत छैक 'मदर इंडिया'
कतेको गार्गी-मैत्रीय-भामती
फूँकल जाइत छथि चूल्हि मे
आकि कोनो 'बदनाम गली' बनैत अछि हुनक ठओर
तखन होइत अछि
गोबरछत्ता सन बहराइत
स्त्री विमर्शक समुच्चा दोकान पर
ताला लटका दी
सुभ्यस्त नगरक पोतल देबार पर
लघुकंचुकि सँ मुड़िआरी दैत
उद्दाम नग्न वक्ष पर
कल्पना,संतोष,पूजा,सिंधू आ भावना कंठक
फोटो साटि दी
लिंगक स्तुति सुनबाक आग्रही कान मे
प्रसव पीड़ाक भैरवी फूँकि दी
उन्नैस-बीसक ओझराएल सामाजिक बिभेद
बीस-बीस कए दी ।
✍👤-विकाश वत्सनाभ (विकाश झा)
१७/१२/२०१६।
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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उद्दोगक आँगन मे
किंवा निर्माणाधीन मेट्रोक माथी पर
स्त्री लोकनिक हेंज
लेसि रहल अछि
सम्बलताक दीप
सहेँ-सहेँ सहे फाटए लागल अछि अन्हार
फरीछ होबए लागल अछि-
एक गोट नवका भोर ।
कुमकुम-मेहदी सजाओल हाथ मे
जेट विमानक कंट्रोल
आ बित्ता भरि घोघक ओजी पर
पियरका हेलमेट
बाँचि रहल अछि
एहि युगक नूतन परिचय।
जखन देखैत छी हिनका सभ केँ
साड़िक फाँर बन्हने
सहकर्मीक संग खैनी चुनबैत
बेरहटिया खेलाक बाद
ओही हेंज मे निसभेर सुतल
कि गाँती मे चिल्हका केँ बन्हने
पजेबा ढ़ोइत
तखन एहि मसक्कैत सँ
उपजैत देखैत छी प्रगतिशील चेतना ।
कोहबर सँ कानून धरि उपेक्षित
ई अधटुकड़ी समाज
औखन याचनाक प्रवित्ति सँ बहरा
भारी उद्दोग सँ
सॉफ्ट स्किल धरि
नव्यतम सुचना-प्रौधौगिकी सँ
प्राच्य अर्गला कील धरि
अपन सशक्त उपस्थिति सँ
एहि शताब्दीक मुहथरि पर
लिखी रहल अछि विवक्षाक अरिपन।
जखन हिनका लोकनिक प्रतिभा
प्रकृति वक्ष सँ
बेसी उत्तंग करैत अछि समुच्चा देशक वक्ष
तखन की खेलक मेदान सँ
कोहबरक ओछाओन धरि
वक्ष अवलोकित कएनिहार सभ
लेताह पतनुकान ?
आ सौराठक अदँकेँ
सोइरि सँ पहिनहि बिदागरी कए
कतेको मैडल निछौनिहार सभ केँ
बेधने हेतैन ग्लानिक बाण ?
ओना शीलाक जुआनी पर
तकथइयाँ करैत देश
जखन अबड़ेरैत छैक 'मदर इंडिया'
कतेको गार्गी-मैत्रीय-भामती
फूँकल जाइत छथि चूल्हि मे
आकि कोनो 'बदनाम गली' बनैत अछि हुनक ठओर
तखन होइत अछि
गोबरछत्ता सन बहराइत
स्त्री विमर्शक समुच्चा दोकान पर
ताला लटका दी
सुभ्यस्त नगरक पोतल देबार पर
लघुकंचुकि सँ मुड़िआरी दैत
उद्दाम नग्न वक्ष पर
कल्पना,संतोष,पूजा,सिंधू आ भावना कंठक
फोटो साटि दी
लिंगक स्तुति सुनबाक आग्रही कान मे
प्रसव पीड़ाक भैरवी फूँकि दी
उन्नैस-बीसक ओझराएल सामाजिक बिभेद
बीस-बीस कए दी ।
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| विकाश झा |
✍👤-विकाश वत्सनाभ (विकाश झा)
१७/१२/२०१६।
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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