माय - बेटी कऽ संवाद , प्रसंग - विवाह
---- माय - बेटी कऽ संवाद -----
प्रसंग - विवाह
✍👤मणि कान्त झा
माय- बाऊ गैऽ, कऽ दैत छियो तोहर
वियाह गैऽ।
कपड़ा देबौहऽ, लत्ता देबौहऽ ,
देबौहऽ चानि कऽ हार गैय।
नुआ देबौहऽ, गहना देबौहऽ,
देबौहऽ साड़ी, पटोरक चारि गैय ,
सनुक देबौहऽ , पेटी देबौहऽ,
देबौहऽ श्रृंगारक पेटार गैय।
बेटी- माय गैऽ ,अखन नै कर हमर वियाह
गैऽ ।
कल जोड़ि कऽ ,हम विनती करैत
छियोक ,
अखन नै कर हमर वियाह गैऽ ।
अपनो पढ़बौ, बौओ कऽ पढ़ेबौ,
राज - काज मऽ हाथ बटैयबौ,
टहल- टिकोरा सब कऽ देबौअऽ,
सुतैय सऽ पहिले पाईर दबेयबौ।
जे कहमऽ ,सबटा हम करबौअऽ ,
भगवती कऽ शप्पत लैईत छियौक,
नै करबो हठात् गैऽ ।
माय अखन नै कर हमर वियाह गैऽ।
माय- बाऊ गैऽ, आब कऽ ले तू हूँ वियाह
गैऽ।
ओढ़नाय सीखैलियोह,
पहिरनैय सीखैलियोह,
सीखैलियोह कनिया - पुतरा संग
खेलनाय गैऽ।
गीत- नाद ,श्रृंगार सीखैलियोह,
सीखैलियोह सब - लुड़ि
संग ,व्यवहार गैऽ ।
घर-द्वारि कऽ काज सीखैलियोह,
सासुर मऽ बसनाय सीखैलियोह,
सीखैलियोह ननैद- दियर कऽ
बौसनाय गैऽ ।
बाऊ गैऽ, आब कऽ लेह तू हूँ वियाह
गैऽ।
बेटी - माय गैऽ ,
हम नै करबौ अखन ,वियाह गैऽ।
पढ़बैय- लिखबैय, स्कूल जेबैय ,
कॉलेज लऽ दड़िभंगा जेबैय,
पढ़ि कऽ अयबोह गाम गैऽ।
पढ़ुआ काका सन हाकीम बनबैय ,
बनबैय बुच्ची दाय सन डागडर गैऽ।
माय गैऽ, अखन नै करबो वियाह
गैऽ ।
माय- तोहर सब संगी- बहिना कऽ ,
भऽ गेलोह वियाह गैऽ ।
रनिया बसलैय, मुनिया बसलैय ,
भेलैय सोनियो कऽ वियाह गैऽ ।
तोहरो बरिस भेलौह वसंत,
चौदह पार गैऽ ।
आब तू हूँ केलहऽ ,
गामक स्कूल पास गैऽ ।
दाय गैऽ , आब तू कऽ लेह वियाह
गैऽ।
बेटी - माय गैऽ ,
हम नै करबौ अखन ,वियाह गैऽ।
पाईर पकैड़ि हम, निहोरा करबैन,
बाबू कऽ दुलारू बेटी,
हमर कोना करथिन वियाह गैऽ।
माय- रौदी होयत छैक, दाहि होयत छैक,
कतय सऽ अनथुन बाबू , पाय गैऽ ।
बौआ , तोहर स्कूल जतौह ,
घर मऽ लगैत छौ ,बेसाह गैऽ ।
भगवतीओ नाहि छथुनह, तोरा पर
सहाय गैऽ ।
बेटी- बाबू कऽ करबैय गुहारि गैऽ ।
हुनकर बेटी बड़ भगवंता , कहैत
सुनलियै माय गैऽ।
बाबू कोनो नै कोनो ,करथुन उपाय
गैऽ।
पढ़बैय, लिखबैय ,हाकिम बनबैय,
बौओ कऽ दबैय पढ़ाई गैऽ ।
तोहर सबहक सेवा करबौअऽ ,
बाबू कऽ देबैय पाय गैऽ ।
माय- पढ़ि लिखि कऽ जऽ हाकीम बनबऽ,
कोना हेतैय तोहर वियाह गैऽ।
ससुर जड़लाह , टाका मनगतौह,
मनगतौह मोटर- कार गैऽ ।
कतय सऽ करथुन बाबू तोहर,
जोगार गैऽ ।
बेटी - क़ाबिल बनि कऽ ,
जखन हाकीम बनबैय,
तखने करबैय वियाह गैऽ।
दहेज प्रथा पर जे, बजर खसेतौह,
तोरा सबकऽ अप्पन बनेतौह,
ओकरा सऽ करबैय ,वियाह गैऽ ।
माय- हगैऽ बाऊ गैऽ, नै करबो ,
तोहर अखन वियाह गैऽ।
नै करबो तोहर------
लेखकः✍👤मणि कान्त झा-----
२८ .१२.२०१६
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
पोस्ट :-अशोक कुमार सहनी
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प्रसंग - विवाह
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| छबि ,मुंन्नी मैथिलि tv नाटक सँ |
✍👤मणि कान्त झा
माय- बाऊ गैऽ, कऽ दैत छियो तोहर
वियाह गैऽ।
कपड़ा देबौहऽ, लत्ता देबौहऽ ,
देबौहऽ चानि कऽ हार गैय।
नुआ देबौहऽ, गहना देबौहऽ,
देबौहऽ साड़ी, पटोरक चारि गैय ,
सनुक देबौहऽ , पेटी देबौहऽ,
देबौहऽ श्रृंगारक पेटार गैय।
बेटी- माय गैऽ ,अखन नै कर हमर वियाह
गैऽ ।
कल जोड़ि कऽ ,हम विनती करैत
छियोक ,
अखन नै कर हमर वियाह गैऽ ।
अपनो पढ़बौ, बौओ कऽ पढ़ेबौ,
राज - काज मऽ हाथ बटैयबौ,
टहल- टिकोरा सब कऽ देबौअऽ,
सुतैय सऽ पहिले पाईर दबेयबौ।
जे कहमऽ ,सबटा हम करबौअऽ ,
भगवती कऽ शप्पत लैईत छियौक,
नै करबो हठात् गैऽ ।
माय अखन नै कर हमर वियाह गैऽ।
माय- बाऊ गैऽ, आब कऽ ले तू हूँ वियाह
गैऽ।
ओढ़नाय सीखैलियोह,
पहिरनैय सीखैलियोह,
सीखैलियोह कनिया - पुतरा संग
खेलनाय गैऽ।
गीत- नाद ,श्रृंगार सीखैलियोह,
सीखैलियोह सब - लुड़ि
संग ,व्यवहार गैऽ ।
घर-द्वारि कऽ काज सीखैलियोह,
सासुर मऽ बसनाय सीखैलियोह,
सीखैलियोह ननैद- दियर कऽ
बौसनाय गैऽ ।
बाऊ गैऽ, आब कऽ लेह तू हूँ वियाह
गैऽ।
बेटी - माय गैऽ ,
हम नै करबौ अखन ,वियाह गैऽ।
पढ़बैय- लिखबैय, स्कूल जेबैय ,
कॉलेज लऽ दड़िभंगा जेबैय,
पढ़ि कऽ अयबोह गाम गैऽ।
पढ़ुआ काका सन हाकीम बनबैय ,
बनबैय बुच्ची दाय सन डागडर गैऽ।
माय गैऽ, अखन नै करबो वियाह
गैऽ ।
माय- तोहर सब संगी- बहिना कऽ ,
भऽ गेलोह वियाह गैऽ ।
रनिया बसलैय, मुनिया बसलैय ,
भेलैय सोनियो कऽ वियाह गैऽ ।
तोहरो बरिस भेलौह वसंत,
चौदह पार गैऽ ।
आब तू हूँ केलहऽ ,
गामक स्कूल पास गैऽ ।
दाय गैऽ , आब तू कऽ लेह वियाह
गैऽ।
बेटी - माय गैऽ ,
हम नै करबौ अखन ,वियाह गैऽ।
पाईर पकैड़ि हम, निहोरा करबैन,
बाबू कऽ दुलारू बेटी,
हमर कोना करथिन वियाह गैऽ।
माय- रौदी होयत छैक, दाहि होयत छैक,
कतय सऽ अनथुन बाबू , पाय गैऽ ।
बौआ , तोहर स्कूल जतौह ,
घर मऽ लगैत छौ ,बेसाह गैऽ ।
भगवतीओ नाहि छथुनह, तोरा पर
सहाय गैऽ ।
बेटी- बाबू कऽ करबैय गुहारि गैऽ ।
हुनकर बेटी बड़ भगवंता , कहैत
सुनलियै माय गैऽ।
बाबू कोनो नै कोनो ,करथुन उपाय
गैऽ।
पढ़बैय, लिखबैय ,हाकिम बनबैय,
बौओ कऽ दबैय पढ़ाई गैऽ ।
तोहर सबहक सेवा करबौअऽ ,
बाबू कऽ देबैय पाय गैऽ ।
माय- पढ़ि लिखि कऽ जऽ हाकीम बनबऽ,
कोना हेतैय तोहर वियाह गैऽ।
ससुर जड़लाह , टाका मनगतौह,
मनगतौह मोटर- कार गैऽ ।
कतय सऽ करथुन बाबू तोहर,
जोगार गैऽ ।
बेटी - क़ाबिल बनि कऽ ,
जखन हाकीम बनबैय,
तखने करबैय वियाह गैऽ।
दहेज प्रथा पर जे, बजर खसेतौह,
तोरा सबकऽ अप्पन बनेतौह,
ओकरा सऽ करबैय ,वियाह गैऽ ।
माय- हगैऽ बाऊ गैऽ, नै करबो ,
तोहर अखन वियाह गैऽ।
नै करबो तोहर------
लेखकः✍👤मणि कान्त झा-----
२८ .१२.२०१६
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पोस्ट :-अशोक कुमार सहनी
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